छत्तीसगढ़: 'मैं जिंदा हूं' - SIR में गड़बड़ी पर विधायक ने उठाए सवाल
एफएनएन, भानुप्रतापपुर : छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जारी है। इसी बीच कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फॉर्म-7 के जरिए एक जिंदा मतदाता को मृत घोषित कर उसका नाम मतदाता सूची से काटने का आवेदन किया गया। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की […] The post मैं जिंदा हूं’: SIR में गड़बड़ी पर बवाल, विधायक ने उठाए सवाल appeared first on Front News Network.
छत्तीसगढ़: 'मैं जिंदा हूं' - SIR में गड़बड़ी पर विधायक ने उठाए सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक जिंदा मतदाता को मृत घोषित करने का मामला सामने आया है। इस घटना ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
कांकेर जिला स्थित भानुप्रतापपुर से एक चौंकाने वाली घटना प्रकाश में आई है, जहां फॉर्म-7 के माध्यम से एक जिंदा मतदाता को मृत घोषित करके उसका नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन किया गया है। इस आवेदन ने निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
क्या है मामला?
पीड़ित मतदाता शामिउल्ला अंसारी ने अपनी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा, "मैं जिंदा हूं, फिर मेरे मृत होने का आवेदन कैसे दिया गया?" उन्होंने बताया कि उन्हें चौक पर लोगों से जानकारी मिली कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन किया गया है, जबकि वे प्रतिदिन भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक पर मौजूद रहते हैं और कई वर्षों से वहीं निवास कर रहे हैं।
विधायक का बयान
कांकेर जिले की विधायक सावित्री मंडावी ने इस मुद्दे पर हलचल मचाई है। उन्होंने कहा, "यह वही बात है, जिसकी आशंका पहले जताई जाती रही है।" विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि भानुप्रतापपुर में कई मुस्लिम भाइयों के नाम काटने के लिए फॉर्म बांटे जा रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने रामपुर पुरी के आदिवासी समुदाय के कम से कम 40 लोगों के नाम हटाने के लिए भी आवेदन किए जाने की जानकारी प्रदान की।
अधिकारी की प्रतिक्रिया
इस संदर्भ में, कलेक्टर ने बताया कि फॉर्म-7 के तहत उन्हें अलग-अलग तरीकों से नाम काटने के प्रयास की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा, "2002 में जो एफआईआर हुई थी, यदि किसी का नाम था, तो उसमें कोई आपत्ति नहीं थी।" इसके साथ ही, बीएलओ या ब्लॉक लेवल एजेंट द्वारा दी गई आवेदन की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक होने पर उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी।
जांच की मांग
विधायक सावित्री मंडावी ने एडीएम को मामले की जांच किए जाने की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए एफआईआर दर्ज करवाने का आश्वासन दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है कि यदि किसी प्रकार से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बंदूक की नोक पर जिज्ञासा
वर्तमान में यह मामला कई सवालों को जन्म दे रहा है। क्या यह केवल एक त्रुटि है, या यह सुनियोजित साजिश है? प्रशासनिक जांच के बाद ही इस स्थिति की वास्तविकता उजागर होगी।
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सारांश में, भानुप्रतापपुर में यह मामला निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है और इस पर गहन जांच आवश्यक है।
टीम धर्म युद्ध
-- सुमीता चौहान