उत्तराखंड: टिमली चेकपोस्ट पर नए ग्रीन सेस सिस्टम की शुरुआत, बाहरी वाहनों पर 80 रुपये से लेकर 700 रुपये तक शुल्क
कार से लेकर बस, ट्रक और भारी वाहनों के लिए अलग-अलग दरें लागू देहरादून। उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली शुरू हो गई है। देहरादून के प्रवेश द्वार टिमली चेकपोस्ट पर अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए शुल्क दरों का बोर्ड लगाया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश, […]
उत्तराखंड: टिमली चेकपोस्ट पर नए ग्रीन सेस सिस्टम की शुरुआत
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में बाहरी राज्य से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली निर्देशित कर दी गई है। टिमली चेकपोस्ट पर विभिन्न प्रकार के वाहनों के लिए शुल्क दरें तय की गई हैं। इस शुल्क में कारों से लेकर भारी माल वाहनों तक के लिए अलग-अलग कटौती की गई है।
चालू हुआ ग्रीन सेस वसूलने का कार्यक्रम
देहरादून। उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली अब आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। देहरादून के प्रमुख प्रवेश मार्ग टिमली चेकपोस्ट पर वाहन श्रेणियों के अनुसार शुल्क दरें प्रदर्शित की गई हैं। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली जैसे राज्यों से आने वाले सभी वाहनों को अब ग्रीन सेस का भुगतान करना होगा।
गाड़ियों के प्रकार के अनुसार बार-बार बदलती दरें
ग्रीन सेस की यह पहल केवल मालवाहन वाहनों तक सीमित नहीं है। विभिन्न श्रेणियों में ऐसे वाहन शामिल हैं जो कार, भारी बसें, ट्रक और निर्माण यंत्रों से लेकर हैं। परिवहन विभाग ने 27 मई 2025 को ग्रीन सेस की संशोधित दरें जारी की थीं।
विभिन्न श्रेणियों के लिए शुल्क डालने की व्यवस्था
- कार/मोटर कैब/मैक्सी कैब: 80 रुपये
- डिलीवरी वैन: 80 रुपये
- हल्का माल वाहन: 120 रुपये
- बस (12 से अधिक सीट): 140 रुपये
- मध्यम/भारी माल वाहन: 250 रुपये
- भारी वाहन (3 एक्सल): 450 रुपये
- भारी वाहन (4 से 6 एक्सल): 600 रुपये
- भारी वाहन (7 या अधिक एक्सल): 700 रुपये
कैसे हैं ग्रीन सेस का प्रभाव?
इस प्रणाली के लागू होने के बाद टिमली चेकपोस्ट से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले सभी बाहरी वाहनों को चुकाया हुआ शुल्क तुरंत लागू किया जाएगा। इससे न केवल राज्य के पर्यावरण को सुरक्षा मिलेगी बल्कि कन्ट्रोल में सुधार और यातायात व्यवस्था को भी स्थिर करने में मदद मिलेगी।
राज्य का यथार्थवादी कदम
यह प्रशासन का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न सिर्फ उत्तराखंड के पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि इससे धूल, धुंआ और अन्य प्रदूषण कम होगा। यह सुनिश्चित करता है कि बाहरी वाहनों के चलते ईंधन की खपत व प्रदूषण का स्तर भी नियंत्रित रहे। ऐसे में यात्रियों और स्थानीय निवासियों को एक स्वस्थ पर्यावरण में रह सकेगें।
इसके अतिरिक्त, ग्रीन सेस वसूल करना एक दीर्घकालिक व्यावस्था बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। यह नियमित रूप से पुनर्स्थापना में भी सहायक होगा और नए निवेश व विकास की संभावनाओं को भी बढ़ावा देगा।
इस समस्या को हल करने के लिए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी वाहन चलाने वाले इसके प्रभाव और आवश्यकता को समझें। लिए, सुझाव है कि प्रदेश के हैंड बुक में ये शुल्क शामिल किए जाएं ताकि यात्रा करने वाले पहले से ही इसकी जानकारी रख सकें।
हमारी दिशा में, यह प्रयास हमें और आगे बढाएगा। उत्तराखंड के पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए राज्यों के बीच सहयोग करना भी अत्यंत आवश्यक हो गया है।
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सादर, टीम धर्म युद्ध