उत्तराखंड में हरीश रावत की आवभगत और सियासी हलचल, भाजपा और कांग्रेस में जंग
कांग्रेस ने बताया वरिष्ठ नेता के प्रति कार्यकर्ताओं का स्नेह, भाजपा ने उठाए राजनीतिक सक्रियता और पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड लौटने के साथ ही प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। 20 सितंबर को दिल्ली से […]
उत्तराखंड में हरीश रावत की आवभगत और सियासी हलचल, भाजपा और कांग्रेस में जंग
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh
कम शब्दों में कहें तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की उत्तराखंड वापसी ने राजनीतिक माहौल में एक नई गर्मी भऱ दी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह और भाजपा की आलोचना, दोनों ही राजनीतिक मैदान में धूम मचा रहे हैं।
देहरादून। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लंबे समय बाद उत्तराखंड में वापसी के साथ ही प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। रावत 20 सितंबर को दिल्ली से उत्तराखंड पहुंचे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने यहां उनका भव्य स्वागत किया। देहरादून में उनके समर्थन में एक रोड शो भी आयोजित किया गया, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।
कांग्रेस का कहना- नेता के प्रति कार्यकर्ताओं का स्नेह
कांग्रेस पार्टी ने हरीश रावत के स्वागत को पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान दर्शाने का प्रयास बताया है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव नीरज त्यागी का कहना है कि रावत का वापसी से पार्टी को अनुभव का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि रावत की स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थिति के बाद उनकी वापसी से कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर है, जिससे कांग्रेस को मजबूती मिलेगी।
त्यागी ने कहा, "कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। हरक सिंह रावत चुनाव प्रबंधन, प्रीतम सिंह प्रचार समिति, करण माहरा चार्जशीट कमेटी और भुवन कापड़ी घोषणापत्र समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।" उनका कहना है कि संगठन की मजबूती केवल एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सामूहिक प्रयास से होती है।
भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल
भाजपा प्रवक्ता और विधायक विनोद चमोली ने हरीश रावत के रोड शो को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रावत की राजनीतिक सक्रियता का संबंध पार्टी के भीतर चल रहे संघर्ष से है। उन्होंने कहा, "रावत अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में उन्हें अपेक्षित रोल नहीं मिल रहा है।"
भाजपा की तरफ से रावत की इस राजनीतिक गतिविधि को शक्ति प्रदर्शन और संगठन के आंतरिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस ने इन विवादास्पद टिप्पणियों को खारिज कर दिया है और इसे उनकी राजनीतिक साजिश बताया है।
रावत का बयान- पार्टी प्राथमिकता है
उत्तराखंड लौटने के बाद हरीश रावत ने स्पष्ट किया है कि वह पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, "2027 के विधानसभा चुनाव में मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसके अनुसार मैं कार्य करूंगा।" उन्होंने अपने आपको पार्टी का सिपाही बताते हुए कहा कि वह कांग्रेस को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
जनहित के मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता
नीरज त्यागी ने राजनीतिक चर्चाओं से इतर जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर जोर देने की आवश्यकता महसूस की। उन्होंने बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, और छात्रों के अधिकारों जैसे मुद्दों को उठाया और कहा कि समाज में हो रहे अपराधों और न्याय की मांग वाले मामलों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा होना चाहिए।
इस बीच, रावत की वापसी के बाद उनके राजनीतिक कार्यक्रमों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। सोमवार को उन्होंने देहरादून के चार सिद्धपीठों में दर्शन किए और आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के निर्णय के अनुसार कार्य करने का संकल्प लिया।
रावत की वापसी ने कांग्रेस के भीतर उनकी भूमिका और आगामी विधानसभा चुनाव पर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। वहीं, भाजपा नेता उनके राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निरंतर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में रावत की सक्रियता और कांग्रेस में उनकी भूमिका पर प्रदेश की राजनीति की नजर बनी रहेगी।
अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें: धर्म युद्ध
सादर, Team Dharm Yuddh - सांगिता वर्मा