यशपाल आर्य का सरकार पर हमला: सरकारी जमीन UIIDB को मुफ्त देने की योजना पर उठाए सवाल

एफएनएन, देहरादून : Government Land देहरादून में प्रदेश की करीब 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की दिशा में ले जाने की सरकार की तैयारी को लेकर कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन जमीनों को UIIDB के माध्यम से […]

यशपाल आर्य का सरकार पर हमला: सरकारी जमीन UIIDB को मुफ्त देने की योजना पर उठाए सवाल

यशपाल आर्य का सरकार पर हमला: सरकारी जमीन UIIDB को मुफ्त देने की योजना पर उठाए सवाल

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कम शब्दों में कहें तो, कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने देहरादून में लगभग 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को UIIDB को मुफ्त देने की सरकार की योजना पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

एफएनएन, देहरादून: देहरादून में उत्तराखंड की लगभग 7 हजार बीघा सरकारी जमीन को व्यावसायिक उपयोग और नीलामी के लिए तैयार करने की सरकार की योजना को लेकर कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यशपाल आर्य का आरोप है कि सरकार ने इन जमीनों को UIIDB के माध्यम से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आर्य ने पूछा कि इन जमीनों के अधीन जो विभाग आते हैं, उनकी अनुमति से जुड़े प्रावधान क्यों हटाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन को UIIDB को मुफ्त में दिए जाने का आधार सरकार को स्पष्ट करना होगा।

जमीन की मार्केट वैल्यू और लीज की कीमत पर सवाल

यशपाल आर्य ने सरकारी जमीनों की स्वतंत्र मार्केट वैल्यूएशन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इन जमीनों का स्वतंत्र बाजार मूल्यांकन कराया गया है कि नहीं। उनका कहना है कि सरकार इन जमीनों को 90 या 99 साल की लीज पर देने की योजना बना रही है, और इस संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि जमीन की कीमत और शर्तें क्या होंगी।

यशपाल आर्य ने यह भी कहा कि प्रदेश के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि जब जमीनें UIIDB को मुफ्त में दी जा रही हैं, तो उसे 10 प्रतिशत मार्जिन किस आधार पर दिया जा रहा है। उन्होंने इस पर भी चिंता जताई कि ऐसा प्रावधान क्यों किया गया है।

सब-लीज और फ्रीहोल्ड जमीन से सरकार को कितना लाभ?

कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि यदि UIIDB इन जमीनों को भविष्य में सब-लीज पर देता है, तो सरकार के हिस्से में होने वाले लाभ का क्या होगा। आर्य ने स्पष्टता की मांग की है कि ऐसे मामलों में सरकार का हिस्सा कितना होगा।

इसके साथ ही, यशपाल आर्य ने फ्रीहोल्ड जमीनों की नई कीमतों के निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी जमीनों का मूल्य किस आधार पर निर्धारित किया जाएगा। आर्य ने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की और सभी नियम व शर्तें सार्वजनिक करने की अपील की।

यशपाल आर्य का यह बयान उन राजनीतिक चर्चाओं को और गर्म कर देता है, जिसमें सरकारी सम्पत्ति के व्यावसायिक उपयोग को लेकर जनता की चिंता सही प्रतीत होती है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता बरते ताकि जनता के हितों का संरक्षण हो सके।

यशपाल आर्य की इस गंभीर चिंता का महत्व इस संदर्भ में भी है कि सरकारी सम्पत्ति का व्यावसायिक उपयोग करते समय सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में जब आर्थिक स्थितियों में सुधार की प्रक्रिया जारी है, ऐसे में यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदेश की संपत्तियां सही तरीके से और सही मूल्य पर उपयोग में लाई जाएं।

सरकार को चाहिए कि वह इस विषय को गंभीरता से ले और यशपाल आर्य द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब स्पष्ट रूप से दे। केवल इस प्रकार की पारदर्शिता से ही जनता का विश्वास जीता जा सकेगा।

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सादर,

टीम धर्म युद्ध
दीपिका शर्मा