हरिद्वार में पहुंचीं भजन गायिका अनुराधा पौडवाल, मिला महंत रविंद्र पुरी का आशीर्वाद
एफएनएन, हरिद्वार : पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा पौडवाल आज हरिद्वार पहुंचीं। उन्होंने पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज से भेंट की और आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर महंत जी ने अनुराधा पौडवाल को माता की चुनरी और गंगा […] The post पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा पौडवाल पहुंचीं हरिद्वार appeared first on Front News Network.
हरिद्वार में पहुंचीं भजन गायिका अनुराधा पौडवाल, मिला महंत रविंद्र पुरी का आशीर्वाद
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कम शब्दों में कहें तो, पद्मश्री से सम्मानित भजन गायिका अनुराधा पौडवाल ने आज हरिद्वार का दौरा किया जहां उन्होंने पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में अवसर प्राप्त किया।
अनुराधा पौडवाल, जो भारतीय भक्ति संगीत की एक विशेष पहचान रखती हैं, आज हरिद्वार के पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में पहुंचीं। यहां उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज से मुलाकात की। महंत जी ने उन्हें माता की चुनरी और गंगा माता की पावन मूर्ति देकर विशेष आशीर्वाद प्रदान किया।
संपर्क और विचारों का आदान-प्रदान
इस भेंट के दौरान, दोनों के मध्य भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और भक्ति संगीत के संरक्षण पर गहन चर्चा हुई। महंत रविंद्र पुरी ने अनुराधा जी की भजन साधना को सराहा और कहा, "भक्ति संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।"
संस्कृति के प्रति जागरूकता
महंत जी ने आगे कहा कि भजन गायन केवल एक कला नहीं, बल्कि यह संस्कृति संरक्षण का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे अपनी परंपराओं को अपनाएं और उन्हें जीवित रखें।
इस पर अनुराधा पौडवाल ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा, "मैंने हमेशा भक्ति संगीत के माध्यम से मां भगवती और गंगा माता की महिमा गाई है। आज का यह आशीर्वाद मेरी साधना को नई ऊर्जा देगा।"
भक्ति संगीत की महत्ता
अनुराधा पौडवाल का भारतीय संगीत में बहुत बड़ा योगदान है। उनके भजन देश के कोने-कोने में गाए जाते हैं और उन्हें सुनकर लोग अपना श्रद्धा भाव व्यक्त करते हैं। उनकी आवाज में एक पहचान है जो भक्ति की गहराई को बताती है। महंत रविंद्र पुरी जी जैसे संतों के साथ उनका संवाद इस बात की पुष्टि करता है कि भक्ति संगीत आज भी हमारे समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
निष्कर्ष
इस भेंट से यह स्पष्ट होता है कि भक्ति संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह लोगों को जोड़ने, सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने और आत्मिक शुद्धता का माध्यम है। अनुराधा पौडवाल का हरिद्वार यात्रा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके गीतों में भक्ति की जो भावना है, वह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
हमारी अपील है कि इस प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए ताकि हम अपनी मूल पहचान और परंपराओं को जीवित रखने में सक्षम हो सकें।
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सादर,
टीम धर्म युद्ध
आरती शर्मा