अल्मोड़ा: बरसात में संस्कृति का प्रदर्शन, विद्या भारती के बच्चे बने आकर्षण का केंद्र
╰┈➤ बच्चों ने बिखेरी प्रतिभा, अतिथि बोले- संस्कृति ही जीवन शैली का आधार सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: विवेकानंद इंटर कालेज रानीधारा अल्मोड़ा में मंगलवार को भारी बारिश के बीच विद्या भारती की संकुल स्तरीय संस्कृति महोत्सव ने धूम मचाई। महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के उपाध्यक्ष गोविंद सिंह पिल्खवाल ने किया। […] The post अल्मोड़ा: बरसात के बीच संस्कृति की बारिश, विद्या भारती के बच्चों का जलवा appeared first on Creative News Express | CNE News.
अल्मोड़ा: बरसात में संस्कृति का प्रदर्शन, विद्या भारती के बच्चे बने आकर्षण का केंद्र
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कम शब्दों में कहें तो, व्यस्त जीवन के बीच बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
अल्मोड़ा में मंगलवार को विवेकानंद इंटर कॉलेज, रानीधारा में विद्या भारती द्वारा आयोजित संकुल स्तरीय संस्कृति महोत्सव ने भले ही बारिश की एक परत चढ़ी हो, लेकिन बच्चों के उत्साह और प्रतिभा ने इसे ढक लिया। महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथि गोविंद सिंह पिल्खवाल, जो हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के उपाध्यक्ष हैं, ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि "संस्कृति ही जीवन शैली का आधार है," जो बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
महोत्सव की झलक
इस महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई थी, जिसमें बच्चों ने नृत्य, गीत, और नाटक के माध्यम से अपनी कला को प्रदर्शित किया। बारिश के बावजूद, बच्चों का उत्साह अद्वितीय था और उन्होंने प्रतिभा की चमक बिखेरी। इस महोत्सव में भाग लेकर उपस्थित अभिभावक और दर्शकों ने भी उनकी तारीफ की।
संस्कृति की महत्ता
गोविंद सिंह पिल्खवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्कृति का संरक्षण और उसका समृद्धि के लिए योगदान काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि "जब बच्चे सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो वे एक साथ मिलकर न केवल अपनी प्रतिभा को साझा करते हैं, बल्कि एकतावाद को भी बढ़ावा देते हैं," जो समाज की एकता और भाईचारे को दर्शाता है।
विशेष अतिथि और गतिविधियाँ
इस महोत्सव में कई अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी भाग लिया। इन सभी ने स्कूल प्रशासन और विद्या भारती के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न विद्यालयों से आए बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधानों में प्रस्तुति देकर माहौल को जीवंत किया। इसके अतिरिक्त, कई घरेलू शिल्प प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिसमें स्थानीय हस्तशिल्प और कला को प्रदर्शित किया गया।
सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ
इस कार्यक्रम के आयोजन से स्थानीय समुदाय में उत्साह का वातावरण बना रहा। अभिभावकों ने कहा कि इस तरह के महोत्सव बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सहायता करते हैं। एक माता ने कहा, "यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि हमारे बच्चे अपनी संस्कृति को जानकर और उसे मानते हुए इस तरह के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।"
भविष्य की योजनाएँ
विद्या भारती के आयोजकों ने इस महोत्सव के सफल आयोजन के बाद भविष्य में और अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। उनका मानना है कि इससे बच्चों के कलात्मक कौशल को और निखारने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा, स्कूल प्रशासन ने यह भी कहा है कि वे बच्चों को और अधिक ऐसी योजनाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे वे अपनी प्रतिभा को न केवल पहचानें, बल्कि उसका उचित विकास भी कर सकें।
महोत्सव के समापन पर गोविंद सिंह पिल्खवाल ने एक बार फिर सभी बच्चों और स्कूल प्रशासन को बधाई दी और इस तरह के कार्यक्रमों के पीछे उनकी मेहनत को सराहा।
अंत में, यह महोत्सव बच्चों के लिए एक अभूतपूर्व अनुभव साबित हुआ और उन्होंने दिखाया कि जब बात संस्कृति की होती है, तो न तो बारिश रुक सकती है और न ही बच्चों का जोश।
इस प्रकार, विद्या भारती के इस महोत्सव ने न केवल संस्कृति का पालन किया, बल्कि इसे जीवित और सजीव रखने का एक महत्वपूर्ण कार्य भी किया।
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सादर,
टीम धर्म युद्ध, अनीता शर्मा