गांव की एक गृहिणी और किसान ने बदल दी अपनी तक़दीर की कहानी!
╰┈➤ सोच बदली तो बदली किस्मत: राधा की एनआरएलएम, तो हरीश की शहतूत ने बदली तकदीर सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: जिले के दो गांवों से सफलता की प्रेरणादायी कहानी सामने आई है, जिसमें एक गृहणी और प्रगतिशील किसान ने यह प्रेरणा दे डाली है कि सोच बदलो, तो तकदीर भी बदलती है। भिकियासैंण के धमेड़ा गांव […] The post एक गांव की गृहिणी और दूसरे गांव के किसान ने पेश की सफलता की मिसाल! appeared first on Creative News Express | CNE News.
एक गांव की गृहिणी और दूसरे गांव के किसान ने पेश की सफलता की मिसाल
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कम शब्दों में कहें तो, “सोच बदली तो बदली किस्मत” यह कहावत अब हकीकत बन चुकी है। अल्मोड़ा जिले के धमेड़ा गांव की गृहिणी राधा और भिकियासैंण के किसान हरीश की सफलता की कहानी ने एक नया अध्याय लिखा है।
प्रेरक अनुग्रह: राधा और हरीश का सफर
हमेशा से यह माना गया है कि सीमित संसाधनों और अवसरों के कारण गांवों में विकास की गति धीमी रहती है। लेकिन धमेड़ा गांव की राधा और हरीश ने इस सोच को नेगेटिव मोड़ दिया है। हरीश, एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने अपने खेतों में शहतूत की खेती की। उनकी मेहनत और लगन ने न केवल उन्हें सफलता दिलाई, बल्कि पूरे गांव को एक नई दिशा भी दिखाई।
राधा की कोशिशें: एनआरएलएम से मिली दिशा
राधा ने एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के अंतर्गत अपने गांव में एक समूह का गठन किया। उन्होंने इस परियोजना के तहत कई तरह की स्व-सहायता गतिविधियाँ शुरू कीं, जिससे गांव की अन्य महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकें। राधा की पहल ने न केवल अपने परिवार की स्थिति को सुधारा बल्कि पूरे गांव में महिलाओं को अपनी पहचान बनाने का प्रेरणा भी दी।
हरीश का योगदान: नई शुरुआत की कहानी
हरीश ने अपनी शहतूत की खेती के माध्यम से न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त किया, बल्कि उसके साथ-साथ वे गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए। उन्होंने अपनी तकनीकों को साझा करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित कीं, जिससे अन्य किसान भी नई खेती की विधियों से लाभ उठा सकें। उनकी स्थिरता और विकास की राह ने साबित कर दिया कि अगर सोच में बदलाव आए तो तकदीर भी बदल सकती है।
संकल्प और सहयोग: परिवर्तन का आधार
राधा और हरीश की कहानी यह साबित करती है कि अगर कोई ठान ले तो किसी भी प्रकार की बाधा को पार किया जा सकता है। उनके प्रयासों ने गांवों में एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया है। दोनों ने अपने-अपने क्षेत्र में सफलता की नयी मिसाल कायम की है, जिसने दूसरों को भी अपनी सीमाओं को पार करने की प्रेरणा दी है।
संक्षेप में: सफलता की कुंजी
यह कहानी सिर्फ दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की है। राधा और हरीश ने साबित किया है कि अगर सोच में बदलाव लाया जाए और एक-दूसरे का सहयोग किया जाए, तो सफलता अवश्य मिलेगी।
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सादर, टीम धर्म युद्ध - सुषमा शर्मा