छह पुलिसकर्मियों पर सीबीआई केस, 2020 के फर्जी चरस बरामदगी मामले में जांच शुरू
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई; अनिल शर्मा को 97.70 ग्राम चरस के कथित झूठे मामले में फंसाने का आरोप देहरादून। उधमसिंह नगर के केलाखेड़ा थाने में वर्ष 2020 में दर्ज कथित चरस बरामदगी मामले में अब तत्कालीन पुलिसकर्मी सीबीआई जांच के घेरे में आ गए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने छह […]
छह पुलिसकर्मियों पर सीबीआई केस, 2020 के फर्जी चरस बरामदगी मामले में जांच शुरू
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कम शब्दों में कहें तो, उधमसिंह नगर के केलाखेड़ा थाने में वर्ष 2020 में दर्ज एक फर्जी चरस बरामदगी मामले में अब छह पुलिसकर्मियों को सीबीआई ने आरोपी बनाया है। यह निर्णय हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अनिल शर्मा को 97.70 ग्राम चरस के झूठे मामले में फंसाया गया।
देहरादून। उधमसिंह नगर के केलाखेड़ा थाने में वर्ष 2020 में दर्ज तथाकथित चरस बरामदगी मामले में अब तत्कालीन पुलिसकर्मी सीबीआई जांच के घेरे में आ गए हैं। अधिक अपडेट के लिए यहाँ क्लिक करें. हाईकोर्ट के आदेश के पश्चात, सीबीआई ने छह तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोप है कि अनिल शर्मा को एक झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाने के लिए उसके कब्जे से 97.70 ग्राम चरस की बरामदगी दर्शाई गई थी। सीबीआई ने 3 सितंबर 2026 को यह मुकदमा दर्ज किया।
2020 में दर्ज हुआ एनडीपीएस मुकदमा
28 जुलाई 2020 को केलाखेड़ा थाने में अनिल शर्मा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि उसके पास से 97.70 ग्राम चरस बरामद हुई है। बाद में अनिल शर्मा ने हाईकोर्ट का रुख करके मामले को निरस्त करने की मांग की।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2020 को सीबीआई को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए थे। सीबीआई की प्रारंभिक जांच ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। रिपोर्ट में कहा गया कि अनिल शर्मा को कथित तौर पर चरस की झूठी बरामदगी के माध्यम से फंसाया गया था।
छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मुकदमा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद, सीबीआई ने तत्कालीन उप निरीक्षक प्रकाश चंद्र टम्टा, कांस्टेबल त्रिभुवन सिंह, चंदन सिंह बिष्ट और हरीश गिरी के अलावा विशेष पुलिस अधिकारियों परवेज अहमद और राजवंत सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
इन सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश समेत आईपीसी के कई धाराएं, जैसे 120-बी, 166, 167, 193, 201, 211, 220, 323, 342, 348 और 465 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड में हेरफेर और साक्ष्य मिटाने के आरोप
हाईकोर्ट में पेश सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पुलिस कर्मियों ने जनरल डायरी में हेरफेर किया, अनिल शर्मा के साथ मारपीट की और उसे जबरन पुलिस चौकी ले गए। इसके अलावा, ढाबे के सीसीटीवी कैमरों की पुरानी फुटेज को संभावित रूप से डिलीट करने का भी आरोप लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ संबंधित पुलिसकर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच संबंधी आदेश के एक हिस्से पर रोक लगाते हुए मामले को हाईकोर्ट के विचार के लिए वापस भेज दिया था।
इसके बाद, 11 अगस्त 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस के आचरण पर गौर करते हुए निष्पक्ष जांच पर संदेह जताया। कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के आरोपों और अनिल शर्मा को झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाने के मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया।
मूल एनडीपीएस केस भी सीबीआई के पास
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही साल 2020 में अनिल शर्मा के खिलाफ दर्ज मूल एनडीपीएस मामले की भी जांच अपने हाथ में ले ली है। अब दोनों मामलों की जांच सीबीआई देहरादून करेगी।
इस जांच में कथित चरस की बरामदगी, पुलिस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों की गहन पड़ताल की जाएगी। यह मामला पुलिस की व्यावसायिक जिम्मेदारी और न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है।
सीबीआई की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस कर्मियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग तो नहीं किया, और अनिल शर्मा को बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया गया। यह मुद्दा समाज में पुलिस की उपस्थिति और उसके कार्यों के प्रति विश्वास के लिए एक महत्वपूर्ण समय है।
हमें उम्मीद है कि सीबीआई इस मामले में निष्पक्षता से जांच करेगी और सही निर्णय लेने में मदद करेगी जिससे न्याय की स्थापना हो सके।
ध्यान दें कि यह मामला केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उन सभी को एक सख्त सन्देश देना है जो अधिकारियों के पद पर रहते हुए अपने अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारियों को भूल जाते हैं।
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सादर, टीम धर्म युद्ध
अंजलि तिवारी