डिजिटल ठगी का शिकार: रिटायर्ड प्रिंसिपल से 73.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी
देहरादून। साइबर ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारी बनकर देहरादून की एक सेवानिवृत्त महिला प्रिंसिपल को कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 73.60 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने महिला को करीब 24 दिन तक घर से बाहर न निकलने और किसी से भी मामले की जानकारी साझा नहीं करने के लिए […]
डिजिटल ठगी का शिकार: रिटायर्ड प्रिंसिपल से 73.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी
देहरादून। साइबर ठगों ने एक बार फिर समाज की निचली पायदान पर महिलाओं को लक्षित किया है। देहरादून की एक सेवानिवृत्त महिला प्रिंसिपल को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई के अधिकारियों का रूप धरकर कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए 73.60 लाख रुपये की ठगी की गई। आरोपियों ने लगभग 24 दिनों तक महिला को अपने जाल में फंसा कर रखा, जिससे वह न केवल मानसिक तनाव में रहीं बल्कि आर्थिक स्थिति पर भी भारी असर पड़ा। एसीसी की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कम शब्दों में कहें तो:
साइबर ठगों ने रिटायर्ड प्रिंसिपल से 73.60 लाख रुपये की ठगी की, जिससे लोगों को जागरूक होना चाहिए कि किसी भी पुलिस अधिकारी के फोन पर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए। हमारी वेबसाइट पर अन्य अपडेट के लिए जुड़े रहें।
पहला फोन कब आया?
शुरुआत 7 अगस्त को हुई, जब महिला को पहले कॉल आया। कॉल करने वालों ने अपने आपको सब इंस्पेक्टर राहुल और संजय बताकर यह दावा किया कि उनके पहचान पत्र पर जारी सिम कार्ड का उपयोग करोड़ों रुपये के घोटाले में किया गया है। इस पहले कॉल ने ही महिला को डराने के लिए एक मजबूत आधार बना दिया।
जाल में फंसाने की प्रक्रिया
आरोपी ठगों ने महिला से कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, उनकी रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पास सुरक्षित रहेगी। इस प्रलोभन पर महिला मान गई और आरोपियों ने उसके विभिन्न बैंक खातों में कुल 73.60 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। ठगों ने विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में खुद को दिखाया और एक फर्जी जांच सेटअप भी स्थापित किया।
परिवार से छिपाने की मजबूरी
महिला ने अपनी चिंता और डर के कारण मामले को अपने डॉक्टर बेटे से भी छुपा लिया। उनके परिवार के मुताबिक, पति ने उन्हें चेतावनी दी थी लेकिन वह ठगों द्वारा बनाए गए भय के माहौल से बाहर नहीं निकल सकीं। जब बेटे को स्थिति का पता चला, तो उसने तुरंत साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस को मामला बताया।
पुलिस कार्रवाई
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार, पीड़िता की तहरीर के अनुसार मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल हुए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें!
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय सतर्क रहें और किसी भी गैर-अधिकारी व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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इस घटना ने फिर से इस बात की याद दिलाई है कि साइबर ठगों की चालाकियों से बचना कितना आवश्यक है। लोगों को अपनी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए।
आपकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, और हमारी जानकारी का उपयोग करके आप विभिन्न ठगी के मामलों से बच सकते हैं। कृपया इस संदर्भ में जागरूक रहिए।
सस्ती सहानुभूति देने के बजाय, हमें अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। टीम धर्म युद्ध।