तीजा-पोरा तिहार: छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का उत्सव - CM साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रविवार को रायपुर के कबीर नगर स्थित दशहरा मैदान में मोर माटी सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित

तीजा-पोरा तिहार: छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का उत्सव - CM साय

तीजा-पोरा तिहार: छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का उत्सव - CM साय

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कम शब्दों में कहें तो, तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और कृषि परंपराओं की भव्यता का प्रतीक है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को रायपुर के कबीर नगर स्थित दशहरा मैदान में मोर माटी सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित तीजा-पोरा तिहार कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है। इस उत्सव के माध्यम से महिलाओं की महत्ता और उनकी भूमिका को मान्यता दी जाती है।

तीजा-पोरा तिहार का महत्व

तीजा-पोरा तिहार का आयोजन हर साल छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से परिवार में एकता और स्नेह को बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाएं एकत्र होकर केक बनाएंगी, गीत गाएंगी और एक-दूसरे के साथ अपनी भावनाओं को साझा करेंगी।

संस्कृति और परंपरा के प्रतीक

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा तिहार हमारे कृषि परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है। इस त्योहार के माध्यम से हम अपनी धरोहर को सहेज सकते हैं। विभिन्न कला और संस्कृति के रंगों में रंगा यह तिहार कवियों, चित्रकारों और शिल्पकारों के कार्यों की भी सराहना करता है।

सामाजिक एकता की प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उनके पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सभी को इस त्योहार में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए ताकि हम सभी अपने संस्कारों को सहेज सकें।

इस कार्यक्रम में शामिल होने वाली महिलाओं ने अपनी पारंपरिक पहनावे में दिखते हुए उत्सव की सजावट में रंग भरा। विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ साथ तीजा-पोरा तिहार का परंपरागत मेला भी आयोजित किया गया, जहाँ पर लोग खेल-कूद, खरीदारी और मनोरंजन में व्यस्त रहे।

निष्कर्ष

तीजा-पोरा तिहार केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की जड़ों को और मजबूत करता है। यह हमें याद दिलाता है कि पारिवारिक मूल्य और संस्कृति हमेशा हमारी पहचान का एक मुख्य हिस्सा रहेंगे। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, हमें अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजना और विकसित करना चाहिए।

इस प्रकार के आयोजनों से न केवल हमारी संस्कृति को बल मिलता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह एक प्रेरणा का स्रोत बनता है।

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सादर,

टीम धर्म युद्ध
प्रियंका शर्मा