देहरादून की सड़कों पर सीमेंट की ईंटें: तेजी से बढ़ती समस्याएं या अस्थायी राहत?
एफएनएन, देहरादून : मानसून के दौरान हुई लगातार बारिश ने राजधानी देहरादून की सड़कों को काफी नुकसान पहुंचाया है। जगह-जगह गड्ढे होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को फिलहाल यातायात के लिए सुरक्षित रखने के लिए गड्ढों की मरम्मत शुरू की है। बड़े गड्ढों में सीमेंट […]
देहरादून की सड़कों पर सीमेंट की ईंटें: तेजी से बढ़ती समस्याएं या अस्थायी राहत?
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में मानसून के कारण आई सड़कें अब समस्या बन रही हैं। लोक निर्माण विभाग ने गड्ढों के मरम्मत के लिए सीमेंट की ईंटों और इंटरलॉकिंग टाइल्स का उपयोग किया है, लेकिन यह उपाय कितना असरदार है?
क्या है समस्या?
एफएनएन, देहरादून: लगातार बारिश ने राजधानी देहरादून की सड़कों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस कारण कई स्थानों पर गड्ढे बन गए हैं, जो यातायात के संचालन में रूकावट डाल रहे हैं। इन गड्ढों को भरने के लिए लोक निर्माण विभाग ने अस्थायी प्रावधानों के तहत सीमेंट की ईंटों और इंटरलॉकिंग टाइल्स का उपयोग किया है।
अस्थायी उपाय, स्थायी समस्या?
लोनिवि के अधिकारियों का कहना है कि पारंपरिक बिटुमिनस पैच वर्क मानसून के दौरान टिकाऊ नहीं रहता है। इसलिए, सीमेंट की ईंटें और इंटरलॉकिंग टाइल्स का उपयोग किया गया है। हालांकि, यह ईंटें कई जगहों पर ऊंची-नीची होने के कारण वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। इससे सड़कों पर अराजकता और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जनरल फिजिशियन, डॉ. केसी पंत ने इस बारे में चर्चा करते हुए बताया कि असमान सड़क के कारण वाहन चालकों और यात्रियों को हिचकोले लगने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक इस प्रकार की सड़कों पर यात्रा करने से कमर, गर्दन और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ने की संभावनाएं हैं।
सड़क की प्राथमिकता
लोनिवि सचिव पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, बारिश के मौसम में गड्ढों में सामान्य सामग्री भरना स्थायी समाधान नहीं है। मानसून खत्म होते ही गड्ढा मुक्त अभियान के तहत इन अस्थायी उपायों को हटा कर स्थायी मरम्मत की जाएगी।
परिवहन विभाग की नजरें
संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा का कहना है कि हालांकि, इंटरलॉकिंग टाइल्स का उपयोग एक उपयोगी उपाय है, लेकिन इसके साथ-साथ सड़कों के उचित रखरखाव की आवश्यकता भी है।
समापन
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लोनिवि मानसून के बाद इन अस्थायी उपायों को हटाकर स्थायी मरम्मत कितनी तेजी से कर पाती है। देहरादून की सड़कों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करना अब सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।
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सीमा सिंह,
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