मानसरोवर, आबूरोड: सशक्त मीडिया के माध्यम से विश्व निर्माण की दिशा में आध्यात्मिक परिवर्तन

*मानसरोवर, आबूरोड – जहाँ मीडिया का होता है आध्यात्मिक कायाकल्प* *विषय: श्रेष्ठ विश्व निर्माण के लिए सशक्त मीडिया – समाचार से आध्यात्मिक परिवर्तन की ओर* *आयोजक: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, ब्रह्माकुमारीज़, मानसरोवर, आबूरोड* *राजस्थान की पावन धरा, अरावली पर्वत की गोद में बसा ब्रह्माकुमारीज़ का दिव्य परिसर – मानसरोवर, आबूरोड। यह केवल ईंट और पत्थरों […]

मानसरोवर, आबूरोड: सशक्त मीडिया के माध्यम से विश्व निर्माण की दिशा में आध्यात्मिक परिवर्तन

मानसरोवर, आबूरोड में मीडिया का आध्यात्मिक कायाकल्प

विषय: श्रेष्ठ विश्व निर्माण के लिए सशक्त मीडिया – समाचार से आध्यात्मिक परिवर्तन की ओर

आयोजक: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, ब्रह्माकुमारीज़, मानसरोवर, आबूरोड

कम शब्दों में कहें तो: मानसरोवर, आबूरोड में आयोजित इस मीडिया कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य था सशक्त मीडिया की भूमिका को समझना और आध्यात्मिक कायाकल्प की दिशा में कदम बढ़ाना।

राजस्थान की पावन भूमि, अरावली पर्वत की गोद में वसती ब्रह्माकुमारीज़ का दिव्य परिसर – मानसरोवर, आबूरोड। यह स्थान केवल ईंट और पत्थरों से बनी इमारत नहीं है, बल्कि एक तपोभूमि है, जहां हजारों आत्माएँ शांति की खोज में आती हैं। हाल ही में, इसी मानसरोवर के विशाल सभागार में एक ऐतिहासिक मीडिया कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसका विषय था “Sustainable and Empowered Media for Building a Better World” अर्थात सशक्त और स्थायी मीडिया का श्रेष्ठ विश्व निर्माण में योगदान।

ब्रह्माकुमारीज़ की नई पहल

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। लेकिन क्या यह स्तंभ केवल तथ्य प्रस्तुत करता है, या समाज को सही दिशा भी दिखाता है? वर्तमान में, मीडिया में नकारात्मकता, टीआरपी की होड़ और सनसनीख़ेज ख़बरों की भरमार है। ऐसे में, मानसरोवर, आबूरोड से एक नई आवाज़ उठी है: “समाचार से आध्यात्मिक परिवर्तन की ओर चलो।” यह विचार न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि आज के समाज में बेहद आवश्यक भी है।

सकारात्मक पत्रकारिता की विशेषताएँ

ब्रह्माकुमारीज़ का मानना है कि पत्रकार की कलम में अपार शक्ति है। एक खबर लाखों लोगों के सोचने के तरीके को बदल सकती है। यदि मीडिया सचेतनता से काम करे, तो नफरत की जगह प्रेम और तनाव की जगह शांति का संदेश फैला सकता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत तब होती है जब पत्रकार स्वयं शांत और सकारात्मक मानसिकता को अपनाते हैं।

कॉनफ्रेंस में उपस्थित सभी पत्रकारों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराने का प्रयास किया गया। इसमें उनका मार्गदर्शन किया गया कि खबरों के तनाव के बीच मन को कैसे शांत रखें, और फेक न्यूज़ के संदर्भ में मानसिक स्थिरता कैसे बनाए रखें।

मानसरोवर का दिव्य अनुभव

मानसरोवर का अर्थ ही है – मन का सरोवर। पवित्र वातावरण, मधुर संगीत और दिव्य ज्ञान ने सभी प्रतिभागियों का मन मोह लिया। इस कॉन्फ्रेंस में देश के जाने माने संपादकों, चैनल हेड्स, यूट्यूबर्स और डिजिटल मीडिया के जानकारों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि अब मीडिया को अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करना चाहिए। हमें खबरों में अच्छाई को भी प्रस्तुत करना होगा, ताकि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज को जोड़ना हो, न कि तोड़ना।

मैं, संजय भाई सोनी, स्वयं इस दिव्य अनुभव का साक्षी रहा। यहाँ आकर ऐसा महसूस हुआ मानो मन की सारी धूल धुल गई हो। मानसरोवर परिसर एक शक्ति केंद्र है, जहां सच्ची शांति और सच्ची खबर का संदेश फैल सकता है।

समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प

आज जब विश्व युद्ध, अशांति, डिप्रेशन और सोशल मीडिया के दुष्प्रचार का सामना कर रहा है, तब ऐसे स्थानों की आवश्यकता है जो स्थायी शांति और स्थायी खबर का संदेश दें। आइए, हम सभी मीडिया कर्मी यह प्रतिज्ञा करें कि हम समाचार में केवल सूचना ही नहीं, सद्भावना भी फैलाएंगे। हम अपनी लेखनी को आध्यात्मिकता की स्याही से भर देंगे। क्योंकि, अगर हमारी कलम में आध्यात्मिकता आ गई, तो वह कलम दुनिया को बदल सकती है।

स्थान: मानसरोवर, आबूरोड
रिपोर्ट: संजय भाई सोनी

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ओम शांति।