उत्तराखंड में बिजली संकट ने उद्योगों को किया प्रभावित, मांग में बढ़ोतरी के चलते कटौती

देहरादून:  उत्तराखंड में जून महीने के दौरान बिजली की मांग ने ऊर्जा विभाग की चिंताओं को बढ़ा दिया है. गर्मी बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली की खपत लगातार नए स्तर पर पहुंच रही है, जबकि राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता मांग के मुकाबले काफी कम साबित हो रही है. यही वजह है कि सरकार […]

उत्तराखंड में बिजली संकट ने उद्योगों को किया प्रभावित, मांग में बढ़ोतरी के चलते कटौती
देहरादून:  उत्तराखंड में जून महीने के दौरान बिजली की मांग ने ऊर्जा विभाग की चिंताओं को बढ़ा दिया ह

उत्तराखंड में बिजली संकट ने उद्योगों को किया प्रभावित, मांग में बढ़ोतरी के चलते कटौती

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में गर्मियों के चलते बिजली की मांग ने ऊर्जा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य की क्षमता की तुलना में मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण उद्योगों में बिजली कटौती की जा रही है।

देहरादून: उत्तराखंड में इस जून महीने के दौरान बिजली की मांग ने ऊर्जा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है, प्रदेश में बिजली की खपत नए रिकॉर्ड बना रही है। हालाँकि, राज्य की उत्पादन क्षमता इस मांग को पूरा करने में असमर्थ साबित हुई है। इससे सरकार और ऊर्जा निगमों को एक तरफ महंगी बाजार से बिजली खरीदने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को बिजली की आपूर्ति में कटौती के कदम उठाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

बिजली की बढ़ती मांग का कारन

उत्तराखंड के राज्य गठन के बाद से औद्योगिक विकास, शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि हुई है। इसके चलते घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने उत्पादन बढ़ाने, नई जल विद्युत परियोजनाओं को संपन्न करने और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के कई उपाय किए हैं। फिर भी, प्रदेश अपनी कुल आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा स्वयं उत्पन्न नहीं कर पा रहा है। जून के आंकड़े इस स्थिति को और स्पष्ट करते हैं।

उत्पादन और मांग का अंतर

वर्तमान में उत्तराखंड में प्रतिदिन बिजली की मांग लगभग 6.1 करोड़ यूनिट तक पहुँच चुकी है। दूसरी ओर, राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता केवल 1.8 करोड़ यूनिट प्रतिदिन के आसपास है। इसका मतलब यह है कि उत्तराखंड अपनी कुल मांग का 40 प्रतिशत बिजली भी स्वयं नहीं उत्पन्न कर सकता। इसलिए, ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्य को अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली इस परिस्थिति में एक बड़ी राहत दे रही है, जिसके तहत राज्य को लगभग 2 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त हो रही है।

यदि राज्य के अपने उत्पादन और केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली को संयोजित किया जाए तो कुल उपलब्धता करीब 3.8 करोड़ यूनिट प्रतिदिन तक पहुँचती है। फिर भी, यह आंकड़ा कुल मांग के मुकाबले काफी कम है। इस प्रकार, लगभग 2 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली की कमी को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को खुले बाजार से बिजली खरीदनी पड़ रही है।

बिजली उत्पादन के उपाय

राज्य में बिजली उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं को तेज किया जा रहा है। इसके साथ ही, सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नए सोलर प्लांट स्थापित करने और निजी निवेश को आकर्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बिजली चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए भी व्यापक अभियान चलाए गए हैं। हाल के वर्षों में बिजली चोरी में कमी आई है, जिससे वितरण हानियों को कम करने में मदद मिली है।

आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव, ऊर्जा ने बताया कि, "बिजली एक्सचेंज और अन्य स्रोतों से खरीदी जाने वाली यह बिजली राज्य के लिए काफी महंगी साबित हो रही है, जिसका असर ऊर्जा निगमों की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है।" इस बढ़ती मांग ने यूपीसीएल को कुछ क्षेत्रों में बिजली प्रबंधन के लिए विशेष कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।

आर्थिक बोझ और भविष्य की चुनौतियाँ

ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ता आर्थिक बोझ चिंताजनक हो गया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में बिजली खरीद पर प्रदेश को लगभग 9,407 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ रहा है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह खर्च लगभग 9,170 करोड़ रुपये था। पिछले वर्ष की तुलना में बिजली खरीद का खर्च सैकड़ों करोड़ रुपये बढ़ गया है। यह स्थिति तब है जब ऊर्जा विभाग लगातार उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने का दावा कर रहा है।

भविष्य में बिजली की मांग और तेजी से बढ़ने की संभावना है। इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग, नए औद्योगिक निवेश और घरेलू उपकरणों की बढ़ती खपत से विद्युत की आवश्यकता लगातार बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में केवल बाजार से बिजली खरीदकर समस्या का समाधान संभव नहीं होगा। दीर्घकालिक रणनीति के तहत उत्पादन क्षमता में वृद्धि, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार आवश्यक होगा। ऊर्जा विभाग भी इस चुनौती का सामना करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है।

इस पूरी स्थिति को देखते हुए, उत्तराखंड को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यक्ता है। नए निवेश, सौर ऊर्जा और जल विद्युत परियोजनाओं की दिशा में ठोस कदम उठाने की दिशा में काम करना होगा।

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धन्यवाद,
Team Dharm Yuddh
(प्रिया मिश्रा)