देहरादून की महिलाओं की ताकत: ‘स्वाभिमान’ ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

देहरादून, 14 मई 2026। राजधानी देहरादून के विकासखंड विकासनगर की ग्राम सोरना डोभरी निवासी कल्पना बिष्ट आज प्रदेशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। राज्य सरकार की योजनाओं और ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से स्थापित उनकी “स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट” ग्रामीण महिला उद्यमिता का सफल मॉडल बन चुकी है। यह यूनिट न […] The post गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत, ‘स्वाभिमान’ ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की मिसाल… appeared first on Pahadi Khabarnama पहाड़ी खबरनामा.

देहरादून की महिलाओं की ताकत: ‘स्वाभिमान’ ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
देहरादून, 14 मई 2026। राजधानी देहरादून के विकासखंड विकासनगर की ग्राम सोरना डोभरी निवासी कल्पना बिष्�

गांव की बेकरी बनी महिलाओं की ताकत, ‘स्वाभिमान’ ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की मिसाल

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून की ग्राम सोरना डोभरी की कल्पना बिष्ट ने महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी महिला बेकरी यूनिट, 'स्वाभिमान', ग्रामीण महिला उद्यमिता का नया चेहरा बन चुकी है।

देहरादून, 14 मई 2026। राज्य की राजधानी देहरादून के विकासखंड विकासनगर की ग्राम सोरना डोभरी की निवासी कल्पना बिष्ट ने आज प्रदेशभर की महिलाओं के लिए सफलता की एक नई लालटेन जलायी है। उनकी “स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट” सरकारी योजनाओं और ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से शुरू हुई, और यह अब ग्रामीण महिला उद्यमिता का एक सफल मॉडल बन चुका है।

‘स्वाभिमान’ का महत्व

कल्पना बिष्ट ने अपनी बेकरी को स्थापित करके न केवल अपने लिए रोजगार सृजित किया बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी अवसरों का द्वार खोला। इस बेकरी के माध्यम से महिलाओं को न केवल आर्थिक स्वतंत्रता मिली है, बल्कि उन्होंने अपने स्वाभिमान को भी नए रूप में उभारा है। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां महिलाएं अपने सपनों को साकार कर रही हैं और समग्र समाज में बदलाव ला रही हैं।

सरकारी योजनाओं का सहयोग

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं, जैसे कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, ने बेकरी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, ग्रामोत्थान परियोजना ने महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया कराए हैं, जिससे उनकी कौशल विकास हुआ है।

महिलाओं की सक्रियता

इस बेकरी यूनिट में कार्यरत महिलाएं अब आत्मनिर्भर हैं और अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित कर रही हैं कि वे कुछ भी कर सकती हैं। कल्पना बिष्ट के नेतृत्व में, कई अन्य महिलाओं ने भी अपने कौशल को निखारते हुए इस बेकरी से लाभ उठाया है।

आर्थिक बदलाव का संकेत

ये महिलाएं सिर्फ बेकरी का संचालन नहीं कर रही हैं, बल्कि वे अपने आसपास के समुदाय में भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। उनके आत्मविश्वास से भरे कदम और उनकी मेहनत समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार, 'स्वाभिमान महिला बेकरी यूनिट' ने न केवल ग्रामीण महिला उद्यमिता को एक नई दिशा दी है बल्कि समाज में महिलाओं की शक्ति और स्वाभिमान को भी सशक्त किया है। यह एक प्रेरणादायक कहानी है जिसमें कल्पना बिष्ट और उनकी टीम ने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पायी है।

हमारे समय की यह कहानी निश्चित रूप से आगे बढ़ने के लिए एकदम प्रेरक साबित हो सकती है। आगे चलकर, यह उम्मीद की जाती है कि अन्य गांवों में भी ऐसी सफलताएं देखने को मिलेंगी।

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सादर,
नेहा शर्मा
Team Dharm Yuddh