ग्रामीणों का मतदान बहिष्कार: ऐरोली के निवासी बोले, "सड़क नहीं तो वोट नहीं"

आपातकाल में झेलनी पड़ती है भारी मुसीबत सीएनई संवाददाता, रानीखेत : “सड़क नहीं तो मतदान नहीं” के नारे के साथ रानीखेत के निकटवर्ती ग्राम ऐरोली के निवासियों ने आगामी 27 तारीख को होने वाले विधानसभा चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग उपेक्षित रहने से आक्रोशित […] The post सड़क नहीं तो मतदान नहीं: ऐरोली के ग्रामीणों ने दी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी appeared first on Creative News Express | CNE News.

ग्रामीणों का मतदान बहिष्कार: ऐरोली के निवासी बोले, "सड़क नहीं तो वोट नहीं"
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ग्रामीणों का मतदान बहिष्कार: ऐरोली के निवासी बोले, "सड़क नहीं तो वोट नहीं"

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कम शब्दों में कहें तो, ऐरोली के निवासियों ने विधानसभा चुनाव में मतदान न करने का ऐलान किया है। यह नारा "सड़क नहीं तो मतदान नहीं" के तहत दिया गया है।

रानीखेत के निकटवर्ती ग्राम ऐरोली की यह घटना राज्य में चुनावी माहौल में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। ग्रामीणों ने आगामी 27 तारीख को होने वाले विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करने की घोषणा की है। वरिष्ठ नागरिकों और युवा पीढ़ी ने एकजुट होकर यह फैसला लिया है, जिससे उनकी सड़क निर्माण की मांग की अनसुनी का आक्रोश स्पष्ट हो गया है।

ग्रामीणों की मांग: सड़क निर्माण

ग्राम ऐरोली के निवासियों का कहना है कि उन्होंने अनेकों बार स्थानीय प्रशासन और नेताओं से सड़क निर्माण की मांग की है। लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर उनकी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जाता है, तो उनका मतदान कोई अर्थ नहीं रखता।

राजनीतिक नेतृत्व की खामोशी

कई सालों से इस गांव की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इलाके में आने-जाने वाली गाड़ियों की कमी के कारण उन्हें चिकित्सा सेवाओं, शिक्षा और दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ग्रामीणों का मानना है कि चुनावी मौसम में उनके मुद्दों को नजरअंदाज करना नेताओं की असंसदीय शैली को उजागर करता है।

आवाज़ उठाते हुए

ग्रामीणों ने कहा है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो वे न केवल मतदान का बहिष्कार करेंगे, बल्कि अपने मुद्दों को लेकर आवाज भी उठाते रहेंगे। यह कदम उन नेताओं के लिए एक चेतावनी है जो चुनाव प्रचार में तो सक्रिय हैं, पर गांव की बुनियादी सुविधाओं के प्रति लापरवाह बने हुए हैं।

निष्कर्ष

इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण भी अपनी आवाज उठा सकते हैं और वे सत्ता धारियों को जवाबदेह ठहराना चाहते हैं। ऐरोली में हो रहे इस मतदान बहिष्कार के फैसले से यह संकेत मिलता है कि जनता अपनी जरूरतों के लिए खड़ी है।

इस प्रकार की घटनाएं प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी उभर रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विकास और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा सिर्फ चुनावों में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण है।

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सादर,
टीम धर्म युध, साक्षी शर्मा