चुनावी खर्च का हिसाब न देना चार नेताओं को पड़ा भारी, आयोग ने तीन साल के लिए किया अयोग्य

2022 विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में निर्वाचन आयोग की कार्रवाई, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 10क के तहत फैसला देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च का निर्धारित विवरण उपलब्ध नहीं कराने के मामले में चार नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 2022 के […]

चुनावी खर्च का हिसाब न देना चार नेताओं को पड़ा भारी, आयोग ने तीन साल के लिए किया अयोग्य

2022 विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में निर्वाचन आयोग की कार्रवाई, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 10क के तहत फैसला

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च का निर्धारित विवरण उपलब्ध नहीं कराने के मामले में चार नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे रामानन्द सिंह, जगजीत सिंह, कमलेश माथुर और बलबीर कुमार तलवार को आदेश की तारीख से तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग ने यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10क के तहत की है। आयोग के आदेश के अनुसार प्रतिबंध की अवधि के दौरान ये चारों नेता संसद, विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे।

चारों नेताओं ने 2022 में लड़ा था चुनाव

आयोग की कार्रवाई की जद में आए चारों नेताओं ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था।

  • रामानन्द सिंह — चकराता विधानसभा क्षेत्र
  • जगजीत सिंह — ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र
  • कमलेश माथुर — राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र
  • बलबीर कुमार तलवार — धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र

चुनावी खर्च का विवरण नहीं कराया उपलब्ध

मामला वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद सामने आया। निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्याशियों से चुनाव के दौरान हुए खर्च का निर्धारित विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके लिए संबंधित प्रत्याशियों को नोटिस भी जारी किए गए।

आयोग के अनुसार, चारों प्रत्याशियों की ओर से दिए गए जवाब और उपलब्ध कराए गए विवरण से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मामले से संबंधित जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को भेजी।

तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक

मामले पर विचार के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 10क के तहत चारों नेताओं को तीन वर्ष की अवधि के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। आदेश की तारीख से प्रभावी यह प्रतिबंध तीन साल तक लागू रहेगा।

इस अवधि में चारों नेता लोकसभा, विधानसभा या विधान परिषद के चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे। निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई को आगामी चुनावी तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला चुनावी खर्च से जुड़े नियमों के पालन को लेकर आयोग की सख्ती को भी दर्शाता है।