शिक्षा में पारदर्शिता का समय, स्कूलों पर प्रशासन की सख्ती

रामनगर: नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर रामनगर में प्रशासन एक्शन मोड में नजर आया. देर शाम उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान के नेतृत्व में स्टेशनरी और बुक सेलरों की दुकानों पर आकस्मिक निरीक्षण किया गया. जिसमें स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताब और ड्रेस खरीदने के दबाव की शिकायतों की जांच की गई. रामनगर […] The post स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त, बुक सेलर्स पर छापे के बाद अब स्कूलों की बारी appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

शिक्षा में पारदर्शिता का समय, स्कूलों पर प्रशासन की सख्ती
रामनगर: नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर रामनगर में प्रशासन एक्शन मोड में नजर आया.

शिक्षा में पारदर्शिता का समय, स्कूलों पर प्रशासन की सख्ती

रामनगर: नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर रामनगर में प्रशासन ने शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठाए हैं।

कम शब्दों में कहें तो स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताबों और ड्रेस खरीदने के लिए दबाव बनाने की शिकायतों को देखते हुए, प्रशासन ने कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान के नेतृत्व में देर शाम स्टेशरी और बुक सेलरों की दुकानों पर आकस्मिक निरीक्षण किया गया। जानकारी के अनुसार, यह निरीक्षण स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताब और ड्रेस खरीदने के दबाव की शिकायतों की जांच के उद्देश्य से किया गया था।

रामनगर में बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर, प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। इस दौरान उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर शहर की विभिन्न किताब और स्टेशनरी दुकानों पर छापेमार कार्रवाई की। उनकी टीम ने सुनिश्चित किया कि स्कूल छात्रों और अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं और न ही निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लेने का दबाव बना रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान, बुक सेलरों की दुकानों की गहनता से जांच की गई। दुकानदारों ने बताया कि वे सिर्फ उन किताबों का स्टॉक रखते हैं, जो स्कूलों द्वारा सुझाई जाती हैं। लेकिन मौके पर मौजूद अभिभावकों ने प्रशासन को एक और तस्वीर दिखाई। उन्होंने बताया कि स्कूलों की ओर से दी गई पर्चियों में कक्षा का तो उल्लेख होता है, लेकिन किसी विशेष किताब या प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिखा होता। यह अभिभावक शिक्षा के नाम पर हो रही मनमानी और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ हैं।

उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की कार्रवाई यहीं समाप्त नहीं होगी। आगामी दिनों में स्कूलों का भी निरीक्षण किया जाएगा। इस बार आवश्यकता पड़ने पर बच्चों के स्कूल बैग की भी जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि वास्तव में कौन-सी किताबें पढ़ाई जा रही हैं। इसके माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल प्रबंधन किसी विशेष प्रकाशक को बढ़ावा देने का काम तो नहीं कर रहा है।

स्कूल ड्रेस खरीदने के मुद्दे पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। एसडीएम ने कहा कि ड्रेस के नाम पर ओवररेटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तय कीमत से अधिक वसूलने के मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह प्रशासन की स्थिति शिक्षा के नाम पर हो रही मनमानी के खिलाफ एक सख्त संदेश है।

जिस प्रकार से प्रशासन की यह कार्रवाई हो रही है, वह निश्चित ही शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और अभिभावकों को किसी प्रकार के वित्तीय दबाव का सामना न करना पड़े।

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