हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हरीश रावत, भाजपा के कलंक से मुक्ति की बात

एफएनएन, हरिद्वार : Haridwar उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। हाल ही में उन्होंने हरिद्वार के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए वहां से प्रतिनिधित्व करने की इच्छा सार्वजनिक की थी। वहीं, अपने तत्कालीन ओएसडी और […]

हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हरीश रावत, भाजपा के कलंक से मुक्ति की बात

हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हरीश रावत, भाजपा के कलंक से मुक्ति की बात

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2022 विधानसभा चुनाव में हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने वहां के प्रति अपने राजनीतिक संबंध को उजागर किया और अपने राजनीतिक सफर पर भी प्रकाश डाला।

एफएनएन, हरिद्वार: उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आगामी विधानसभा चुनाव में हरिद्वार से अपने चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा व्यक्त की है। हाल ही में उन्होंने अपने राजनीतिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए इस बात का खुलासा किया। रावत का मानना है कि हरिद्वार से चुनाव लड़ना उनके लिए महत्वपूर्ण है, खासकर भाजपा द्वारा लगाए गए कलंक से मुक्ति पाने के संदर्भ में।

चंदन सिंह जीना मामले पर रावत का स्पष्टीकरण

हाल ही में चर्चा में आए चंदन सिंह जीना के बारे में रावत का कहना है कि उन पर अनावश्यक आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में स्वयं की लड़ाई लड़ेंगे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सितंबर में जीना से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जो 2016 में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ने वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा था।

उत्तराखंड के विकास का विचार

रावत ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान उत्तराखंड के लिए अनूठे विकास मॉडल की बात की है। उनका मानना है कि राज्य के विकास में कई योजनाएं सुचारू रूप से कार्यान्वित नहीं हो पाईं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन के कारण कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हुईं। रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान की गई विकास योजनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि उनकी सोच को केवल आंशिक सफलता मिली।

कांग्रेस से अपने जुड़ाव के बारे में क्या कह रहे हैं रावत

कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर रावत ने कहा कि वह पार्टी और गांधी-नेहरू परिवार के प्रति वफादार हैं। उनका राजनीतिक जीवन कांग्रेस के संबंधित रहा और वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों का सामना करने के लिए भी तत्परता दिखाई।

विवेक और ईमान की बात

सवाल पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा विवाद में वह अकेले महसूस करते हैं, रावत ने कहा, "मेरे साथ मेरा विवेक और ईमान है।" उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड की जनता के साथ खड़े हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद, रावत ने अपनी सक्रियता बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।

भर्तियों का महत्व

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 42,000 से अधिक भर्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए कई उपाय किए। उनका उद्देश्य उत्तराखंड की छवि को सकारात्मक बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दबाव को भर्ती प्रक्रिया में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रावत के हालिया घटनाक्रम में ईडी के सामने पेश होने का मामला भी शामिल है, जहां उनसे आयकर रिटर्न और परिवार की संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे।

रावत की इस स्थिति ने विपक्ष को भी सतर्क किया है, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक विश्वास को बनाए रखा है और आगे बढ़ने की पुष्टि की है।

समापन में, रावत का यह बयान और उनकी चुनावी यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वह केवल अपनी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास के लिए भी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।

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टीम धर्म युद्ध
— साक्षी शर्मा