हरीश रावत ने डेनिस शराब विवाद पर डाली चुनौती, SIT जांच के लिए किए तैयार
भाजपा पर पलटवार कर पूछा सवाल, अगर डेनिस गलत थी तो आज सेना की कैंटीन में कैसे बिक रही है शराब? देहरादून। उत्तराखंड में डेनिस शराब विवाद को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान पर पलटवार करते […]
डेनिस शराब विवाद: हरीश रावत से सरकार को चुनौती, SIT जांच कराए
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कम शब्दों में कहें तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने डेनिस शराब विवाद में सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है और SIT के समक्ष पेश होने की इच्छा जताई है। उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि डेनिस ब्रांड गलत था, तो यह आज सेना की कैंटीन में कैसे बिक रहा है? इस सवाल ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं को गर्म कर दिया है।
देहरादून: उत्तराखंड में डेनिस शराब विवाद को लेकर सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान पर पलटवार करते हुए सरकार को चुनौती दी है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए। रावत ने कहा कि "यदि डेनिस शराब के मामले में कोई घोटाला हुआ है, तो सरकार इसकी जांच कराए।" उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद इस मामले में गठित जांच टीम के सामने अपना पक्ष रखने को तैयार हैं।
भाजपा पर किए सवाल
हरीश रावत ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस में बार-बार उठाया है। उन्होंने सवाल पूछा, "यदि डेनिस ब्रांड गलत था, तो अब ये शराब सेना की कैंटीन में कैसे बिक रही है?" रावत ने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यात्मक जांच की आवश्यकता है।
आरक्षित अधिकार और हिस्सेदारी का सवाल
रावत ने बताया कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगम को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से शराब बिक्री का दायित्व सौंपा गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कैसे 20 प्रतिशत आरक्षित विपणन अधिकार के आदेश के बावजूद, तीन से चार महीनों में हिस्सेदारी 70 से 80 प्रतिशत कैसे बढ़ गई।
उन्होंने कहाः "इस व्यवस्था के पीछे किसकी भूमिका थी? अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?" रावत ने यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में उनसे चूक हुई थी और सब कुछ भरोसे पर आधारित था।
सुबोध उनियाल को की चुनौती
रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से अपील की कि वे विशेष जांच दल (SIT) गठित कर पूरे मामले की जांच कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि आज बाजार में डेनिस के अलावा अन्य ब्रांड जैसे हिलटॉप, काफल, माल्टा और संतरा भी उपलब्ध हैं। इस संदर्भ में, जांच का उद्देश्य एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई को उजागर करना होना चाहिए।
रावत ने इस बात को भी स्वीकार किया कि वे शुरुआत में डेनिस नाम से परिचित नहीं थे और इसे लंबे समय तक "डेनिम" कहते रहे। भाजपा द्वारा बार-बार इस मुद्दे को उठाने के कारण उन्हें इसका नाम याद हो गया।
निष्कर्ष
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि "डेनिस विवाद में 'मेरा डेनिस, तेरा डेनिस' की राजनीति करने के बजाय निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि अगर कोई गलती हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक होने चाहिए। रावत के इस बयान के बाद प्रदेश में डेनिस शराब विवाद को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
इस विवाद ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को एक नया मोड़ दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर आगे भी सियासत का घमासान जारी रहेगा।
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सादर,
नेहा शर्मा,
टीम धर्म युद्ध