Dehradun की सड़कों पर सीमेंट की ईंटों का पैचवर्क, राहत या बढ़ी परेशानी?

एफएनएन, देहरादून : मानसून के दौरान हुई लगातार बारिश ने राजधानी देहरादून की सड़कों को काफी नुकसान पहुंचाया है। जगह-जगह गड्ढे होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को फिलहाल यातायात के लिए सुरक्षित रखने के लिए गड्ढों की मरम्मत शुरू की है। बड़े गड्ढों में सीमेंट […]

Dehradun की सड़कों पर सीमेंट की ईंटों का पैचवर्क, राहत या बढ़ी परेशानी?

एफएनएन, देहरादून : मानसून के दौरान हुई लगातार बारिश ने राजधानी देहरादून की सड़कों को काफी नुकसान पहुंचाया है। जगह-जगह गड्ढे होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को फिलहाल यातायात के लिए सुरक्षित रखने के लिए गड्ढों की मरम्मत शुरू की है। बड़े गड्ढों में सीमेंट की ईंटों और इंटरलॉकिंग टाइल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

लोनिवि के मुताबिक, लगातार बारिश के दौरान सामान्य बिटुमिनस पैच वर्क ज्यादा टिकाऊ नहीं रहता। इसी वजह से कई स्थानों पर अस्थायी तौर पर इंटरलॉकिंग टाइल्स और सीमेंट की ईंटें लगाई गई हैं। हालांकि, कई सड़कों पर यह अस्थायी व्यवस्था अब वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण भी बनती दिखाई दे रही है।

कई जगह ऊंची-नीची हुईं ईंटें

देहरादून के कई मुख्य मार्गों पर सड़क के गड्ढों में सीमेंट की ईंटें बिछाई गई हैं। कुछ स्थानों पर ईंटें ऊंची-नीची होने के कारण वाहन चालकों को हिचकोलों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, वाहनों की आवाजाही के कारण कुछ जगहों पर ईंटों के खिसकने की स्थिति भी सामने आ रही है।

गड्ढों और असमान सड़क से बचने के लिए वाहन चालक अचानक लेन बदलते हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ ही सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ सकता है।

मानसून के बाद हटाई जाएंगी इंटरलॉकिंग टाइल्स

लोक निर्माण विभाग का कहना है कि सीमेंट की ईंटें और इंटरलॉकिंग टाइल्स स्थायी समाधान नहीं हैं। इन्हें बारिश के दौरान सड़कों को चलने लायक बनाए रखने के लिए अस्थायी तौर पर इस्तेमाल किया गया है। गड्ढा मुक्त अभियान के दौरान इन टाइल्स और ईंटों को हटाकर सड़कों का स्थायी उपचार किया जाएगा।

लोनिवि सचिव ने बताई रणनीति

लोनिवि सचिव पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, बरसात के दौरान गड्ढों में मलबा या सामान्य सामग्री भरने से मरम्मत ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती। ऐसे में इंटरलॉकिंग सीमेंट टाइल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि बारिश का मौसम खत्म होने के बाद गड्ढा मुक्त अभियान के तहत इन टाइल्स को हटाकर सड़कों की स्थायी मरम्मत की जाएगी।

परिवहन विभाग ने बताया उपयोगी प्रयोग

परिवहन विभाग के संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा ने सड़कों पर इंटरलॉकिंग सीमेंट टाइल्स के इस्तेमाल को उपयोगी प्रयोग बताया है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ सड़क के उचित रखरखाव को भी जरूरी बताया।

हिचकोलों से स्वास्थ्य पर भी असर

सड़कों पर लगातार हिचकोलों के कारण वाहन चालकों और यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. केसी पंत ने भी फोन पर बातचीत में बताया कि खराब सड़कों पर लगातार हिचकोले लगने से शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। खासकर लंबे समय तक ऐसी सड़कों पर सफर करने से कमर, गर्दन और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

अब देखना होगा कि मानसून खत्म होने के बाद लोनिवि इन अस्थायी पैच को हटाकर सड़कों का स्थायी उपचार कितनी तेजी से पूरा करता है।