देहरादून में विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, पांच आरोपी सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़े
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। राजपुर थाना पुलिस ने तरला नागल रोड स्थित ऑर्चिड पार्क के एक फ्लैट में छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य मोबाइल और लैपटॉप में एंटीवायरस […]
देहरादून में विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। यह कार्रवाई राजपुर थाना पुलिस द्वारा की गई।
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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में क्राइम ब्रांच ने विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। राजपुर थाना पुलिस ने तरला नागल रोड स्थित ऑर्चिड पार्क के एक फ्लैट में छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह मोबाइल और लैपटॉप में एंटीवायरस इंस्टॉल करने के नाम पर अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाता था। आरोपियों पर 100 डॉलर के गिफ्ट कार्ड के जरिए ठगी करने का आरोप है।
पुलिस ने मौके से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक आईपैड और पांच चार्जर बरामद किए हैं। इसके अलावा आई-20, वरना और थार समेत तीन लग्जरी वाहनों को भी सीज किया गया है। यह कार्रवाई एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल के नेतृत्व में 12 अक्टूबर की देर रात की गई।
एंटीवायरस इंस्टॉल करने के नाम पर बनाते थे शिकार
पुलिस द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी विदेशी नागरिकों से संपर्क करने के लिए अंग्रेजी नामों का इस्तेमाल करते थे। वे गूगल वॉइस ऐप के माध्यम से फोन कर लोगों को उनके मोबाइल या लैपटॉप में तकनीकी खराबी होने की बात कहते थे। इसके बाद समस्या को सुलझाने और एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराने के नाम पर 100 डॉलर का गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था।
आरोप है कि गिफ्ट कार्ड का नंबर या उसकी तस्वीर हासिल करने के बाद आरोपी अधिकांश ग्राहकों को एंटीवायरस ऐप उपलब्ध नहीं कराते थे। इसके बजाय, गिफ्ट कार्ड को कम कीमत पर दूसरे विदेशी नागरिकों को बेचकर रकम हासिल करते थे। इस तरह तकनीकी सहायता देने के बहाने लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था।
नोएडा में काम करने के बाद देहरादून में शुरू किया कारोबार
पुलिस की पूछताछ में मुख्य आरोपी आशीष नागर ने खुलासा किया कि वह पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में कार्यरत था। वहां विदेशी नागरिकों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी की जाती थी। करीब तीन महीने पहले नौकरी छोड़ने के बाद वह देहरादून आ गया और राजपुर क्षेत्र में किराये पर फ्लैट लेकर अपने साथियों के साथ कॉल सेंटर चलाने लगा।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने विदेशी नागरिकों से संपर्क करने के लिए करीब पांच हजार मोबाइल नंबर खरीदे थे। इन नंबरों के जरिए लोगों को फोन कर अपने जाल में फंसाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह कुछ समय तक एक स्थान पर काम करने के बाद अपनी जगह बदल देता था, ताकि पुलिस और अन्य एजेंसियों की नजरों से बच सके।
मेरठ और सुल्तानपुर के रहने वाले हैं आरोपी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशीष नागर, अक्षत शर्मा, अंशु मुद्गल, राज सिंह और अभिनव सिंह के रूप में की है। जानकारी के अनुसार, इनमें चार आरोपी मेरठ और एक आरोपी सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी है।
राजपुर थाना प्रभारी पीड़ी भट्ट ने बताया कि पांचों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर मामले की आगे जांच की जा रही है।
पुलिस अब गिरोह के काम करने के तरीके, गिफ्ट कार्ड के लेनदेन और विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
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© Team Dharm Yuddh, द्वारा साक्षी शर्मा