सौरभ हत्याकांड: फांसी की सजा के बाद मुस्कान और साहिल की जेल में टूटी नींद, हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
सजा सुनते ही रो पड़े दोनों दोषी, मुस्कान ने अधिवक्ता से मिलने की लगाई गुहार; जेल में बढ़ाई गई निगरानी बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत की ओर से पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद दोनों की जेल में मनोदशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। […]
सौरभ हत्याकांड: फांसी की सजा के बाद मुस्कान और साहिल की जेल में टूटी नींद, हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
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कम शब्दों में कहें तो, सौरभ राजपूत हत्याकांड के गुनहगारों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी जेल में हलचलों के बारे में जानना जरूरी हो गया है। सजा सुनते ही दोनों की हालत गंभीर हो गई, और सोशल मीडिया पर भी इस मामले की गर्मागर्म चर्चाएं हो रही हैं।
मेरठ में हुए बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। सजा सुनने के बाद दोनों की मनोदशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी के दौरान जैसे ही सजा का ऐलान हुआ, दोनों ने रोना शुरू कर दिया। इस दौरान जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें संभाला। साहिल ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से कहा, “मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई... अब जान बचेगी या नहीं, इसे लेकर कोई भरोसा नहीं।”
जेल में बढ़ी निगरानी
सजा सुनाने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है। उनकी बैरकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी लगातार निगरानी की जा रही है। जेल सूत्रों के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद दोनों सदमे में हैं और वे बैरक में अन्य बंदियों से बातचीत तक नहीं कर रहे हैं।
मुस्कान ने अधिवक्ता से मिलने की गुहार लगाई
बैरक में लौटते समय मुस्कान ने जेल अधीक्षक से अपनी अधिवक्ता रेखा जैन से मिलने की गुहार लगाई। उसने कहा कि उसे हाईकोर्ट में अपनी पैरवी करानी है और अधिवक्ता से बातचीत करने की जरूरत है। मुस्कान ने अपनी दो बेटियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मुस्कान ने उनसे कहा कि उसकी अधिवक्ता से संपर्क कराया जाए, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा की जा सके। जेल अधीक्षक ने उसे जेल के नियमानुसार आगे की कार्रवाई के बारे में बताया।
हाईकोर्ट में अपील का विकल्प
जिला अदालत से मृत्युदंड की सजा मिलने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया की दिशा हाईकोर्ट पर केंद्रित हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि दोषियों के पास फैसले को चुनौती देने का विकल्प मौजूद है। इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो सर्वोच्च न्यायालय में भी अपील की जा सकेगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता पवन प्रधान ने बताया कि यदि दोषियों के पास अपनी ओर से अधिवक्ता नियुक्त करने के साधन नहीं हैं, तो विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। मृत्युदंड के मामलों में आगे की प्रक्रिया की दिशा संबंधित अदालतों के आदेशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
22 गवाहों और डिजिटल सबूतों के आधार पर दोषी
इस मामले में 30 सितंबर 2026 को अदालत ने 22 गवाहों के बयानों और डिजिटल सबूतों के आधार पर मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया। यह मामला न सिर्फ मेरठ में, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना रहा। न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसले में कानून की सर्वोच्चता की बात की।
नशीली दवाओं का उल्लेख
सौरभ की हत्या से जुड़े विवरण में ये भी सामने आया है कि खैरनगर स्थित उषा मेडिकल स्टोर से नशीली दवाएं खरीदी गई थीं। यह बताया गया कि सौरभ को दवाएं देने के बाद उनकी हत्या की गई। इस संबंध में मेडिकल स्टोर के मालिक अमित जोशी को गवाह बनाया गया जिसने अदालत में गवाही दी।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
मृत्यु दंड की सजा सुनाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कई यूजर्स ने फैसले का समर्थन किया, वहीं कई लोगों ने वैवाहिक विवादों के समाधान के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की बात की। इस घटना ने पति-पत्नी के रिश्तों में विवाद, अलगाव और कानूनी समाधान जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ी है।
विशेषज्ञों की सलाह
मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों ने रिश्तों में तनाव और विवादों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। उनका कहना है कि पति-पत्नी के बीच मतभेद होने पर संवाद और परामर्श की आवश्यकता होती है। अगर रिश्ते में हिंसा की नौबत आ जाए तो कानूनी सहायता लेना बेहतर है।
अब आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हाईकोर्ट में अपील और अन्य न्यायिक विकल्पों से मामले की अगली दिशा तय होगी।
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सादर,
टीम धर्म युद्ध
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