कांग्रेस में अंतर्द्वंद्व: 2027 चुनाव से पूर्व बढ़ती सियासी खींचतान
देहरादून: उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी का एक धड़ा वरिष्ठ नेता हरीश रावत के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है, जबकि कुछ अन्य नेता पुराने मतभेदों को लेकर एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से निशाना साध रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से […] The post कांग्रेस में अंदरूनी कलह उजागर, 2027 चुनाव से पहले बढ़ी खींचतान appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
कांग्रेस में अंतर्द्वंद्व: 2027 चुनाव से पूर्व बढ़ती सियासी खींचतान
देहरादून:
कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर गुटबाजी ने फिर से जोर पकड़ लिया है। पार्टी का एक हिस्सा वरिष्ठ नेता हरीश रावत के पक्ष में खड़ा है जबकि अन्य नेता पुराने मतभेदों के चलते एक-दूसरे पर हमलावर हैं। ऐसे हालात के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गर्म चर्चा का विषय बन गई है।
कांग्रेस, जो कि सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है, अपने ही नेताओं के संघर्ष से जूझ रही है। इस स्थिति में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को विपक्षी आरोपों का जवाब देने से ज्यादा पार्टी में उठ रहे विवादों को संभालने में ध्यान देना पड़ रहा है।
गुटबाजी का असर
पार्टी संगठन में नई कार्यकारिणी का गठन पिछले दो महीनों से चर्चा का विषय बना है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व जंबो कार्यकारिणी के गठन का समर्थन नहीं कर रहा है, जबकि कई वरिष्ठ नेता अपने समर्थकों को संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए दबाव बना रहे हैं। इस खींचतान के कारण नई कार्यकारिणी का गठन फिलहाल ठप हो गया है।
कांग्रेस में गुटों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुछ नेता एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगा रहे हैं, जिससे पार्टी की एकजुटता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो चुके हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो इसका प्रभाव पार्टी की चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
नवीनतम उम्मीदें और आंतरिक चुनौती
नवंबर 2025 में जब पार्टी नेतृत्व ने गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया था, तब संगठन में नई ऊर्जा लाने की उम्मीद जताई गई थी। कार्यकर्ताओं को विश्वास था कि पार्टी मजबूती से चुनावी मैदान में प्रवेश करेगी। लेकिन पिछले कुछ महीनों में आंतरिक मतभेद सामने आ गए हैं और अभी तक प्रदेश अध्यक्ष अपनी पूरी टीम तैयार नहीं कर पाए हैं।
स्थिति को सुधारने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने सभी नेताओं से अपील की है कि वे सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से बचें। उनका कहना है कि यदि किसी को कोई शिकायत है, तो उसे पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाना चाहिए।
आगे की राह
गणेश गोदियाल ने यह भी कहा है कि कांग्रेस को सत्ता में पुनः स्थापित होने के लिए सभी नेताओं को अपने मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करना होगा। संगठन को सुदृढ़ बनाने के लिए जल्दी ही प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी। अब यह देखना होगा कि पार्टी अपने आंतरिक मतभेदों को किस गति से सुलझा पाती है और आगामी 2027 चुनाव के लिए अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाती है।
मार्च 2025 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। भाजपा का लगातार बढ़ता राजनीतिक दबदबा और विपक्षी दलों का एकजुट होना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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यह समाचार संगठनात्मक स्थिति के संदर्भ में कांग्रेस की ऐसी दीर्घकालिक चुनौतियों का संकेत देता है, जिनका समाधान खोजने के लिए कड़ी मेहनत और एकजुटता की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, नई रणनीतियों के साथ-साथ अध्यक्ष गणेश गोदियाल को साथियों के बीच बेहतर संचार स्थापित करने की भी आवश्यकता है। केवल समय पर अनुचित निर्णय लेने से ही पार्टी को एक मजबूत राजनीतिक गणना की तैयारी के लिए उपाय मिलेंगे।
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सादर,
टीम धर्म युद्ध
साक्षी शर्मा