गाजियाबाद के हरीश राणा का दिल्ली एम्स में निधन: 13 साल का कोमा अंत, इच्छामृत्यु की इजाजत
एफएनएन, दिल्ली : दिल्ली के एम्स में भर्ती गाजियाबाद के हरीश राणा का आज निधन हो गया। बीते सोमवार को मेडिकल कमेटी की बैठक हुई। जिसमें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। गाजियाबाद के हरीश राणा का आज दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे बीते 13 साल से […] The post गाजियाबाद के हरीश राणा का दिल्ली एम्स में निधन, 13 साल से कोमा में थे appeared first on Front News Network.
गाजियाबाद के हरीश राणा का दिल्ली एम्स में निधन: 13 साल का कोमा अंत, इच्छामृत्यु की इजाजत
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कम शब्दों में कहें तो, गाजियाबाद के हरीश राणा का दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया है। वे पिछले 13 साल से कोमा में थे। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी।
दिल्ली: गाजियाबाद के हरीश राणा, जो कि पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे, का आज दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। हरीश को पिछले सोमवार को मेडिकल कमेटी की बैठक के दौरान निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पर चर्चा के बाद उपचार प्रदान किया जा रहा था। हरीश राणा का इलाज इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) में चल रहा था।
आखिरी दिन की स्थितियां
उन्हें उपशामक देखभाल वार्ड में रखा गया था और पिछले एक सप्ताह से उनकी स्थिति पर गहन निगरानी रखी जा रही थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने 23 मार्च को बताया था कि उन्हें कुछ समय और निगरानी में रखा जा सकता है। हरीश पिछले एक सप्ताह से बिना खाना और पानी के जीवित थे, जो एक जटिल और संवेदनशील मामला था। इस दौरान उनके माता-पिता चमत्कार की प्रतीक्षा कर रहे थे।
ऐसी थी उनकी कहानी
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में, रक्षाबंधन के दिन, बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए वे एक चौथी मंजिल से गिर गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद, उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में, दिसंबर 2013 में उन्हें दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया का मरीज बताया, जिसके कारण उनके हाथ-पैर निष्क्रिय हो गए थे।
इच्छामृत्यु की प्रक्रिया
हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के चलते उनके माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की थी। हालांकि इसे 8 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसने 11 मार्च 2026 को हरीश को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। यह प्रक्रिया कई चरणों में की गई और परिवार को इस संवेदनशील मामले में काफी मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
माँ की भावनाएँ
जैसे ही हरीश के निधन की खबर मिली, उनकी मां अस्पताल के गलियारे में हनुमान चालीसा का पाठ कर रही थीं। उन्होंने कहा कि "मेरा बेटा सांस ले रहा था, उसकी धड़कन अब भी चल रही थी, लेकिन अब वह मुझे छोड़कर चला गया है।"
इस प्रकार, हरीश राणा का निधन न केवल उनके परिवार के लिए एक दुखद मोड़ है, बल्कि समाज के लिए भी एक गहन विचार और सार्थक बातचीत का विषय है। इच्छामृत्यु का यह मामला निश्चित रूप से हमारी चिकित्सा और कानूनी प्रणाली में एक जटिल मुद्दा पेश करता है।
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सादर,
Team Dharm Yuddh, अनुराधा