देहरादून में छात्रों के लिए शराब की होम डिलीवरी नेटवर्क का पर्दाफाश, लॉ स्टूडेंट निकला मास्टरमाइंड

एफएनएन, देहरादून : Dehradun उत्तराखंड के देहरादून में आबकारी विभाग ने शराब की होम डिलीवरी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बिधौली में सक्रिय इस नेटवर्क के जरिए पीजी और हॉस्टल में रहने वाले कॉलेज छात्र-छात्राओं तक इंपोर्टेड शराब पहुंचाई जाती थी। जांच में सामने आया है कि […]

देहरादून में छात्रों के लिए शराब की होम डिलीवरी नेटवर्क का पर्दाफाश, लॉ स्टूडेंट निकला मास्टरमाइंड
एफएनएन, देहरादून : Dehradun उत्तराखंड के देहरादून में आबकारी विभाग ने शराब की होम डिलीवरी करने वाले एक �

देहरादून में छात्रों के लिए शराब की होम डिलीवरी नेटवर्क का पर्दाफाश

कम शब्दों में कहें तो, आबकारी विभाग ने देहरादून में एक बड़े अवैध शराब नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसका संचालन एक 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट कर रहा था। इस नेटवर्क के जरिए कॉलेज के छात्रों को इंपोर्टेड शराब पहुंचाई जाती थी। ब्रेकिंग न्यूज़, दैनिक अपडेट्स और एक्सक्लूसिव कहानियों के लिए - धर्म युद्ध

उत्तराखंड के देहरादून में, आबकारी विभाग ने एक बड़े शराब होम डिलीवरी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बिधौली में संचालित हो रहा था। जांच के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से पीजी और हॉस्टल में रहने वाले कॉलेज के छात्रों को इंपोर्टेड शराब की होम डिलीवरी की जा रही थी।

गर्वित उर्फ विक्रांत का खुलासा

जांच के दौरान पाया गया कि नेटवर्क का संचालन 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित उर्फ विक्रांत कर रहा था। उसके खिलाफ आरोप है कि वह दिल्ली और हरियाणा से सस्ती शराब मंगवाकर देहरादून में ऊंचे दामों पर बेचता था। उसके पास युवाओं के एक समूह को 15 हजार रुपये महीने की सैलरी पर रखा गया था, जो शराब की डिलीवरी का काम करते थे। इस नेटवर्क से जुड़े आदित्य नाम के युवक को हाल ही में 10 पेटी इंपोर्टेड शराब के साथ गिरफ्तार किया गया है।

पहला खुलासा 25 अगस्त को

आबकारी विभाग ने 25 अगस्त को बिधौली क्षेत्र में एक विशेष कार्रवाई की और इस नेटवर्क का खुलासा किया। एक कार और दो स्कूटी तस्करी में इस्तेमाल की जा रही थी, जिन्हें जब्त कर लिया गया। इस कार्रवाई में दो तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया था।

छात्रों के लिए रेट कार्ड

जांच में यह भी सामने आया कि गर्वित उर्फ विक्रांत ने पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए एक रेट कार्ड तैयार कराया था। उसे छात्रों में वितरित किया जाता था, और ऑर्डर मिलने के बाद दोपहिया वाहनों से शराब की डिलीवरी की जाती थी।

WhatsApp ग्रुप से डिलीवरी प्रबंधन

आबकारी विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि इस डिलीवरी नेटवर्क को एक WhatsApp ग्रुप के माध्यम से प्रबंधित किया जाता था। इस ग्रुप में शामिल युवान अपनी हाजिरी सेल्फी भेजकर लगाते थे और शराब की डिलीवरी की लोकेशन, सप्लाई और पैसे के लेन-देन की जानकारी साझा करते थे। गर्वित उर्फ विक्रांत इस ग्रुप का लीडर था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट गए आरोपी

गर्वित उर्फ विक्रांत के खिलाफ आबकारी अधिनियम के गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद वह फरार हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की। हालांकि, लगभग डेढ़ महीने की जांच के बाद, जब उसे राहत नहीं मिली, तो उसने 7 अक्टूबर को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया और उसे जेल भेज दिया गया।

गर्वित की मां समेत अन्य गिरफ्तार

आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद गर्वित की मां भी गिरफ्तारी की गई, जिसके बारे में संदेह है कि वह इस नेटवर्क में शामिल थी। अन्य गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में आदित्य नाम का युवक सामने आया, जिसे 10 पेटी इंपोर्टेड शराब के साथ गिरफ्तार किया गया।

2022 में लॉ की पढ़ाई के लिए देहरादून आया गर्वित

जांच से पता चला है कि गर्वित उर्फ विक्रांत हरियाणा का निवासी है और 2022 में लॉ की पढ़ाई करने के लिए देहरादून की एक निजी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। पढ़ाई के दौरान उसने शराब की तस्करी शुरू की और धीरे-धीरे अपना नेटवर्क विकसित किया।

प्रति दिन 20 से 25 पेटी बिक्री का दावा

आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए रोजाना करीब 20 से 25 पेटी इंपोर्टेड शराब बेची जा रही थी। इस नेटवर्क के चलते सरकार को हर साल 5 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था।

इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैसे युवा अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अवैध गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं। इस प्रकार के नेटवर्क न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाते हैं। आगे की अपडेट्स के लिए, [यहाँ](https://dharmyuddh.com) क्लिक करें।

टीम धर्म युद्ध द्वारा, साक्षी मेहरा