धर्म को समझने की नई परिभाषा: बाबा भवानी गिरी महाराज का साक्षात्कार
सीएनई विशेष, साक्षात्कार – भवानी गिरी महाराज : आज के दौर में जब भोग-विलास, दिखावा और तेज़ रफ्तार जिंदगी ने युवाओं को मानसिक रूप से अशांत और दिशाहीन कर दिया है, तब समाज को ऐसे मार्गदर्शकों की सबसे अधिक आवश्यकता है जो शब्दों से नहीं, अपने कर्मों से दिशा दिखाएं। देहरादून के गढ़ी कैंट क्षेत्र […] The post साक्षात्कार : धर्म डर नहीं, जीवन जीने की कला है: बाबा भवानी गिरी महाराज appeared first on Creative News Express | CNE News.
धर्म को समझने की नई परिभाषा: बाबा भवानी गिरी महाराज का साक्षात्कार
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कम शब्दों में कहें तो, भोग-विलास और तेज़ रफ्तार जीवन के इस युग में, बाबा भवानी गिरी महाराज ने धर्म का एक नया दृष्टिकोन प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि धर्म केवल डर या सभी को नियंत्रित करने वाला एक तंत्र नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।
युवाओं की दिशाहीनता पर चिंतन
देहरादून के गढ़ी कैंट क्षेत्र में बाबा भवानी गिरी महाराज का साक्षात्कार एक महत्वपूर्ण अवसर था। उन्होंने बताया कि कैसे आज के युवा अवसाद और दिशाहीनता के शिकार हो रहे हैं। भोग-विलास और दिखावे की संस्कृति ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया है। ऐसे में, समाज को ऐसे मार्गदर्शकों की आवश्यकता है, जो शब्दों से नहीं, अपने कार्यों से दूसरों को प्रेरित कर सके।
धर्म को समझने की आवश्यकता
भवानी गिरी महाराज का मानना है कि धर्म का वास्तविक सार उसके कार्यों में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म का उद्देश्य स्वयं के अंदर की शांति और संतुलन को प्राप्त करना है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे एक व्यक्ति अपने आंतरिक मनोविज्ञान को समझकर अपने कर्मों को सही दिशा में मोड़ सकता है।
कर्म और धार्मिकता
बाबा ने बताया कि असली धार्मिकता वहीं से शुरू होती है जब हम अपने कर्मों का ज्ञान रखते हैं। जब समाज के युवा ऐसे मार्गदर्शकों से मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं, जो खुद उदाहरण बनकर जीते हैं, तो वे अवश्य ही सही दिशा में बढ़ सकते हैं।
समाज का दायित्व
भवानी गिरी महाराज ने यह भी बताया कि आज के समाज का दायित्व है कि वे युवाओं को ऐसे शिक्षण दें जिससे वे भोग-विलास की चकाचौंध से बच सकें और अपनी आत्मा की आवाज सुन सकें। जीवन की असली खुशी और सच्चे सुख की प्राप्ति तभी संभव है जब हम अपने आंतरिक साधनों का सहयोग ले सकें।
कुल मिलाकर क्या कहा?
बाबा भवानी गिरी महाराज का साक्षात्कार न केवल धर्म की एक नई परिभाषा प्रस्तुत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समाज में मार्गदर्शकों की कितनी अधिक आवश्यकता है। जब हम अपने कर्मों में ईमानदार और सच्चे होते हैं, तभी हम दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।
अंत में, भवानी गिरी महाराज ने कहा कि असली जीवन जीने का कला है, इसका विस्तार तब होता है जब हम अपने धर्म को सही रूप में समझ पाते हैं।
इस महत्वपूर्ण साक्षात्कार के जरिए हम सभी को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए और धर्म एवं जीवन के इन शिक्षाओं को अपनाना चाहिए।
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सादर,
आर्या शर्मा
टीम धर्म युद्ध