रिवर्स माइग्रेशन और नवाचारी कृषि ने बदल दी उत्तराखंड के बागेश्वर की तस्वीर

*रिवर्स माइग्रेशन और आधुनिक कृषि से बदल रही उत्तराखंड के सुदूर जनपद बागेश्वर की तस्वीर* *पहाड़ में लौटती उम्मीद: आधुनिक कृषि से बागेश्वर में रुक रहा पलायन* उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से पलायन एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन बागेश्वर जनपद में अब यह प्रवृत्ति सकारात्मक दिशा में बदलती दिखाई दे रही […] The post रिवर्स माइग्रेशन और आधुनिक कृषि से बदल रही उत्तराखंड के सुदूर जनपद बागेश्वर की तस्वीर appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

रिवर्स माइग्रेशन और नवाचारी कृषि ने बदल दी उत्तराखंड के बागेश्वर की तस्वीर
*रिवर्स माइग्रेशन और आधुनिक कृषि से बदल रही उत्तराखंड के सुदूर जनपद बागेश्वर की तस्वीर* *पहाड़ मे�

रिवर्स माइग्रेशन और नवाचारी कृषि ने बदल दी उत्तराखंड के बागेश्वर की तस्वीर

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में रिवर्स माइग्रेशन और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से पलायन की समस्या का समाधान होते दिखाई दे रहा है। युवा और किसान अब अपने गांव वापस लौट रहे हैं और गांवों की पुनर्निर्माण की दिशा में बड़े कदम उठा रहे हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एक लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ था, लेकिन बागेश्वर जनपद में अब यह प्रवृत्ति बदलती नजर आ रही है। यहाँ के युवा और किसान आधुनिक तकनीकों के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। गांव लौटकर, वे अपने समुदायों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्वरोजगारी योजनाओं में शामिल हो रहे हैं।

जिलाधिकारी के प्रयासों से मिली नई दिशा

जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े के नेतृत्व में, जनपद में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उद्यान, कृषि एवं मत्स्य विभाग के समन्वित प्रयासों से किसानों को 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान पर पॉलीहाउस और आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी आय में भी वृद्धि कर रही है।

सफलता की नई कहानी

जैविक और आधुनिक कृषि में सफलतापूर्वक कदम बढ़ाने के उदाहरणों में, सलीगांव के मनोज कोरंगा का उल्लेख किया जा सकता है। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाते हुए तीन पॉलीहाउस और तीन मत्स्य तालाबों का निर्माण किया है। साथ ही, खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के बाद, उनकी वार्षिक आमदनी तीन से चार लाख रुपये हो गई है, जहाँ वे कई स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

महिलाओं का सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी बागेश्वर की तस्वीर बदल रही है। मन्यूड़ा गांव की हंसी शाह ने वैज्ञानिक खेती को अपनाते हुए मोटे अनाज और सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है। उन्हें कृषि विभाग से 80 प्रतिशत अनुदान पर उपकरण दिए गए हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय चार से पांच लाख रुपये तक पहुँच गई है। वे अब 40 से अधिक महिलाओं को भी स्वरोजगारी के लिए प्रेरित कर रही हैं।

कीवी उत्पादन में बढ़ती रुचि

बागेश्वर में कीवी का उत्पादन भी तेजी से बढ़ रहा है। 2022-23 से पूर्व, जहां कीवी की खेती का क्षेत्रफल सिर्फ 5-8 हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 80 हेक्टेयर हो गया है। इस प्रक्रिया में 350 से अधिक किसान जुड़े हैं, जिनकी समग्र आय 13-14 लाख रुपये से बढ़कर 1.5 से 1.7 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।

महत्वपूर्ण जानकारी: किसान दान सिंह ने ‘आत्मा योजना’ और ‘आरकेवीवाई’ के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर वर्मी कंपोस्ट, लाइन बुवाई, और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करते हुए उत्पादन में 30-40 प्रतिशत की वृद्धि की है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में रिवर्स माइग्रेशन और आधुनिक कृषि तकनीकों अपनाकर न केवल युवा बल्कि महिलाएं भी अपने समुदाय की आर्थिक स्थिति में सुधार ला रही हैं। यह बदलाव ना सिर्फ पलायन की प्रवृत्ति को रोक रहा है बल्कि पंचायत क्षेत्रों में विकास का एक नया अध्याय भी लिख रहा है।

जानकारी के लिए अधिक अपडेट के लिए हमारे पोर्टल पर जाएं: Dharm Yuddh

सादर, टीम धर्म युद्ध
निशा वर्मा