अल्मोड़ा: मुंशी प्रेमचंद की दूरदर्शिता ने समाज के असली स्वरूप को किया उजागर
➥ बुरांश सपोर्टिंग हैंड फाउंडेशन की भिकियासैंण में जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: बुरांश सपोर्टिंग हैंड फाउंडेशन की ओर से आंखर पुस्तकालय भिकियासैंण में शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी हुई। जिसमें मुंशी प्रेमचंद के जीवन दर्शन तथा साहित्य पर परिचर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि […] The post अल्मोड़ा: मुंशी प्रेमचंद की दूरदर्शी सोच ने किया समाज का असल रूप बयां appeared first on Creative News Express | CNE News.
अल्मोड़ा: मुंशी प्रेमचंद की दूरदर्शिता ने समाज के असली स्वरूप को किया उजागर
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh
कम शब्दों में कहें तो, मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर भिकियासैंण में बुरांश सपोर्टिंग हैंड फाउंडेशन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी ने उनके साहित्य और जीवन दर्शन को एक बार फिर से जीवंत कर दिया।
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: बुरांश सपोर्टिंग हैंड फाउंडेशन ने शुक्रवार को आंखर पुस्तकालय में मुंशी प्रेमचंद की 142वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य, उनके जीवन के अनुभवों और उनके समाज के प्रति दृष्टिकोण पर गहन चर्चा की।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय समाज की जड़ों को गहराई से समझा था। उनके लेखन में भारतीय जनजीवन की सच्चाई, संघर्ष और समाज की बुराइयों के प्रति गंभीरता से विचार किया गया था।
मुंशी प्रेमचंद का साहित्य और उसकी प्रासंगिकता
वक्ताओं ने बताया कि प्रेमचंद की कहानियाँ और उपन्यास आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। उन्होंने न केवल भारतीय समाज की वास्तविकताओं को उजागर किया, बल्कि उनकी कहानियाँ आम आदमी के संघर्ष और उनके सपनों का दर्पण भी हैं।
प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास "गोदान" और उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह", "कफन" और "दो बैलगाड़ी" हमारी सामाजिक समस्याओं को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। प्रेमचंद ने न केवल समाज की बुराइयों को उजागर किया, बल्कि उन बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा भी दी।
साहित्य और समाज के बीच संबंध
गोष्ठी में उपस्थित लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य और समाज का गहरा संबंध होता है। मुंशी प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज की सच्चाईयों को उजागर किया और अव्यवस्थाओं के खिलाफ एक मुहिम का प्रारंभ किया। उनके लेखन ने न केवल सामाजिक चेतना को जागरूक किया बल्कि समाज के वंचित वर्गों की आवाज को भी सामने लाया।
भविष्य की दिशा
वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के युवा पीढ़ी को प्रेमचंद के विचारों को आत्मसात करना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि हम उनके संदेशों को समझें और अपने समाज में उनके दिशा निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ें। प्रेमचंद की सोच ने हमें यह सिखाया है कि हम कैसे अपने समाज की वास्तविकताओं का सामना कर सकते हैं और कैसे सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
अंत में, बुरांश सपोर्टिंग हैंड फाउंडेशन की ओर से सभी वक्ताओं का आभार जताया गया जिन्होंने प्रेमचंद के विचारों को साझा किया और उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। यह गोष्ठी मुंशी प्रेमचंद के अद्वितीय योगदान के प्रति एक श्रद्धांजलि थी।
इसके अलावा, भविष्य में इस तरह के विचारों को साझा करने के लिए और कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखने का संकल्प लिया गया।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें।
— सुमिता शर्मा, टीम धर्म युद्ध