उत्तराखंड की 104 हेल्थ हेल्पलाइन: एक दशक में कॉल सेंटर से प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम का सफर
104 हेल्थ हेल्पलाइनः एक दशक में कॉल सेंटर से ‘प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम’ तक पहुंचा उत्तराखंड मेडिकल, पुलिस और अग्निशमन सेवाओं के लिए 108 नंबर से लगभग हर कोई परिचित है, लेकिन उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम बन […]
104 हेल्थ हेल्पलाइन: एक दशक में कॉल सेंटर से ‘प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम’ तक पहुंचा उत्तराखंड
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की 104 हेल्थ हेल्पलाइन एक दशक में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में विकसित हो गई है, जो अब न केवल नागरिकों की कॉल का जवाब देती है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों की सेहत की निगरानी करती है।
मेडिकल, पुलिस और अग्निशामक सेवाओं के लिए 108 नंबर के बारे में तो लगभग हर कोई जानता है, लेकिन 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का एक प्रमुख माध्यम बन कर उभरी है। यह पहल उत्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य सेवा को और अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून द्वारा संचालित 104 हेल्थ कॉल सेंटर अब तक एक करोड़ 38 लाख से अधिक स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है। यह सेवा राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से संबंधित लाभार्थियों तक पहुंच बना रही है।
प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का विकास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की दिशा में कदम उठाए हैं। इसी सोच के अनुरूप, 104 हेल्पलाइन को केवल एक सूचना देने वाले कॉल सेंटर से बदलकर एक प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है।
फॉलोअप प्रक्रिया: अस्पताल में पंजीकरण के साथ शुरू
इस प्रणाली की एक विशेषता यह है कि स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के पंजीकरण के तुरंत बाद सम्बंधित जानकारियाँ 104 कॉल सेंटर को भेजी जाती हैं। इसके बाद, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे लाभार्थियों से नियमित रूप से संपर्क किया जाता है ताकि उनकी स्थिति की जानकारी ली जा सके।
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के मामले में यह व्यवस्था अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक, उन्हें टीकाकरण और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का फॉलोअप किया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद लगभग डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर ध्यान रखा जाता है।
27 स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी
104 कॉल सेंटर का कार्य आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया जैसे विविध कार्यक्रमों के लाभार्थियों से सीधे संबंध स्थापित करना है।
योजनाओं की डिलीवरी और फीडबैक की प्रक्रिया
104 हेल्थ हेल्पलाइन की भूमिका यहाँ खत्म नहीं होती। कॉल सेंटर के माध्यम से लाभार्थियों से फीडबैक लिया जाता है। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहनों की सूचना भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्तियों तक पहुँच रहा है या नहीं।
एक दशक के इस सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक टोल-फ्री नंबर केवल फोन उठाने की प्रणाली नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी और जवाबदेही का एक प्रभावी तंत्र हो सकता है। पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल दूरदराज के लोगों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं का नागरिक केंद्रित दृष्टिकोन
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं करती, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करती है।
स्वास्थ्य सेवाओं के इस उत्कृष्ट मॉडल के माध्यम से उत्तराखंड ने न केवल अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया है, बल्कि एक मिसाल भी पेश की है, जो अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हो सकती है।
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सादर, टिम धर्म युद्ध अनुजा शर्मा