उत्तराखंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा पेपर लीक मामले में सीबीआई ने असिस्टेंट प्रोफेसर को किया गिरफ्तार
सीबीआई ने उत्तराखंड ग्रेजुएट लेवल एग्जामिनेशन पेपर लीक मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर को किया गिरफ्तार – आरोपी को मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा – जांच में सामने आया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने कथित तौर पर आरोपी प्राइवेट व्यक्ति को उसकी बहन के ज़रिए मिले प्रश्न पत्र का कुछ हिस्सा […] The post सीबीआई ने उत्तराखंड ग्रेजुएट लेवल एग्जामिनेशन पेपर लीक मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर को किया गिरफ्तार appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
उत्तराखंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा पेपर लीक मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई
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कम शब्दों में कहें तो, सीबीआई ने उत्तराखंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा पेपर लीक मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है। आरोपी को मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा। यह पूरी स्थिति न केवल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में सुरक्षा की आवश्यकता को भी उजागर करती है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हाल ही में उत्तराखंड ग्रेजुएट लेवल एग्जामिनेशन पेपर लीक मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर, श्रीमती सुमन को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी टिहरी गढ़वाल के शहीद श्रीमती हंसा धनाई राजकीय महाविद्यालय में हुई। इस मामले में उनकी भूमिका की जांच करते हुए सीबीआई ने उन्हें दो अन्य प्राइवेट व्यक्तियों, मोहम्मद खालिद और उनकी बहन सबीहा के साथ एक साजिश का हिस्सा मानते हुए गिरफ्तार किया।
जांच की कहानी
सीबीआई ने इस मामले पर तब कार्यवाही की जब उत्तराखंड सरकार ने जांच को अपने हाथ में लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोपी प्राइवेट व्यक्ति को प्रश्न पत्र के कुछ हिस्से हल करने में मदद की। जानकारी के अनुसार, आरोपी ने अपनी बहन के जरिए प्राप्त प्रश्न पत्र का उपयोग किया। इस संदर्भ में, गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई है।
करवाई के कारण
जैसे-जैसे मामले में गहराई से जांच हुई, एसआईटी ने पाया कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपनी बहन के साथ मिलकर परीक्षा में मदद करने के लिए उत्तर भेजे थे। यह बातें मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी सबूतों से भी साबित हुई। सीबीआई का उद्देश इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई करना है ताकि छात्रों के लिए एक निष्पक्ष और समर्पित परीक्षा वातावरण तैयार किया जा सके।
आगे की प्रक्रिया
असिस्टेंट प्रोफेसर को शुक्रवार 28 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया है और अब उन्हें मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा। यह मामला शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा सवाल उठाता है। शिक्षा की दुनिया में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सभी संबंधित प्राधिकरणों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।
राय
इस तरह की घटनाएं न केवल शिक्षा के क्षेत्र को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती हैं। हमें एक ऐसी प्रणाली की जरूरत है, जहाँ निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाए। सीबीआई की आवश्यक जांच इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और हमें इसकी सराहना करनी चाहिए।
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निष्कर्ष के तौर पर, यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अपने छात्रों और शिक्षा प्रणाली की रक्षा के लिए कितनी सख्ती से कार्य करना चाहिए। हमें ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ, एक नए ढांचे का निर्माण भी करना होगा जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों।
टीम धर्म युद्ध - प्रियंका शर्मा