भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अभिषेक प्रकाश की सेवा बहाल

एफएनएन, लखनऊ : भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में निलंबित किए गए उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सरकार ने बहाल कर दिया है. नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने शनिवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. फिलहाल उन्हें किसी विशिष्ट पद पर तैनाती नहीं दी गई […] The post भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अभिषेक प्रकाश की सेवा बहाल appeared first on Front News Network.

भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अभिषेक प्रकाश की सेवा बहाल

एफएनएन, लखनऊ : भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में निलंबित किए गए उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सरकार ने बहाल कर दिया है. नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने शनिवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. फिलहाल उन्हें किसी विशिष्ट पद पर तैनाती नहीं दी गई है, लेकिन जल्द ही नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है. उत्तर प्रदेश सरकार के नियुक्ति अनुभाग-5 द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया है.

करियर में महत्वपूर्ण भूमिकाएं: अभिषेक प्रकाश ने अपने करियर के दौरान लखनऊ, लखीमपुर खीरी, अलीगढ़ और हमीरपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दी हैं. वे मायावती, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ तीनों सरकारों में प्रमुख पदों पर तैनात रहे और कई बार ‘टॉप परफॉर्मर’ के रूप में चर्चित हुए. उनकी सबसे प्रमुख भूमिका ‘इन्वेस्ट यूपी’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के सचिव के रूप में रही थी. इस दौरान उन्होंने राज्य में निवेश बढ़ाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स को गति प्रदान की है.

Photo Credit: ETV Bharat

मार्च में भ्रष्टाचार का आरोप लगा: मार्च 2025 में उनके करियर में तब बड़ा विवाद खड़ा हुआ जब पंजाब के एक व्यवसायी विश्वजीत दत्ता ने उन पर गंभीर आरोप लगाए. शिकायत के अनुसार, एक सोलर प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले कथित तौर पर 5% कमीशन की मांग की गई थी. यह रिश्वत उनके सहयोगी निकांत जैन के माध्यम से मांगे जाने का दावा किया गया था. एसटीएफ की शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने के बाद, पिछले साल 20 मार्च को उन्हें अनुशासन एवं अपील नियमावली-1969 के तहत निलंबित कर दिया गया था.

विभागीय जांच चलती रहेगी: निलंबन के दौरान यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंचा, जहां फरवरी 2026 में एक बड़ा मोड़ आया. हाईकोर्ट ने साक्ष्य की कमी और तकनीकी खामियों के आधार पर सहयोगी निकांत जैन के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है. इस अदालती फैसले के बाद सरकार ने उनके निलंबन को एक साल पूरा होने से पहले ही समाप्त करने का निर्णय लिया है. विशेष सचिव विजय कुमार ने स्पष्ट किया है कि भले ही अभिषेक प्रकाश सेवा में वापस आ गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी.

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