उत्तराखंड में सीएए के तहत 153 शरणार्थियों को मिला भारतीय नागरिकता की अधिकारिक मान्यता
सीएए के तहत उत्तराखंड में 153 शरणार्थियों को मिली भारतीय नागरिकता देहरादून: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 लागू किए जाने के बाद उत्तराखंड में रह रहे शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद राज्य में रह रहे 153 हिंदू शरणार्थियों […] The post सीएए के तहत उत्तराखंड में 153 शरणार्थियों को मिली भारतीय नागरिकता appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
उत्तराखंड में सीएए के तहत 153 शरणार्थियों को मिला भारतीय नागरिकता की अधिकारिक मान्यता
देहरादून:
कम शब्दों में कहें तो, केंद्र सरकार द्वारा 2019 में लागू किए गए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के तहत उत्तराखंड में 153 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद, इन हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दे दी गई है, जिसे सरकारी दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस प्रक्रिया ने लंबे समय से शरणार्थी परिवारों को स्थायी पहचान एवं अधिकार दिलाने में सहायता की है।
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सीएए लागू होने की संपूर्ण प्रक्रिया
सीएए का उद्देश्य धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करना है। केंद्र सरकार ने 2019 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर इस कानून को पारित किया, जिसे संसद से अनुमोदन प्राप्त हुआ। इसके अंतर्गत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।
उत्तराखंड में शरणार्थियों के आवेदन
सीएए लागू होने के बाद, उत्तराखंड में पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान से आए कुल 198 व्यक्तियों के आवेदन दर्ज किए गए। इनमें पाकिस्तान से 189, अफगानिस्तान से 6 और बांग्लादेश से 3 व्यक्तियों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था। संयुक्त जांच के द्वारा, पाकिस्तान से आए 147 और अफगानिस्तान से 6 आवेदकों को नागरिकता प्रदान की गई, जिससे कुल 153 लोगों को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है।
स्थायी पहचान की प्राप्ति
इनमें से अधिकांश आवेदक पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्रों से संबंधित हैं। इनके परिवार के सदस्य देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में निवास कर रहे हैं, जहां उन्हें पिछले कई वर्षों से आश्रय मिला हुआ है। मौजूदा समय में 45 आवेदन अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित हैं, जिनमें पाकिस्तान से आए 42 और बांग्लादेश से आए 3 व्यक्तियों के आवेदनों का समावेश है।
प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में नागरिकता का वितरण
राज्य में नागरिकता प्रदान किए जाने की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस कदम से लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे शरणार्थी परिवारों को स्थायी पहचान और अधिकार मिल गए हैं, जिसके तहत वे अब विधिवत भारतीय नागरिक माने जाएंगे। यह प्रक्रिया उन शरणार्थियों के लिए न सिर्फ कानूनी पहचान का माध्यम है, बल्कि उनके समाज में एक स्थायी स्थान भी अस्तित्व में लाती है।
इस प्रक्रिया के बाद, अपेक्षित है कि शरणार्थी परिवार और अधिक आत्मनिर्भरता महसूस करेंगे तथा भारत के सुसंस्कृत समाज में अपनी भूमिका निभाने में सक्षम होंगे।
इसके अलावा, यह देखते हुए कि नागरिकता अधिनियम के प्रभाव का बहुत व्यापक दायरा हो सकता है, इस तरह की प्रक्रियाएं भारत की विविधता में एकता की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा सकती हैं।
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संध्या वर्मा, टीम धर्म युद्ध