गंगोत्री हाईवे के सुरक्षा कार्यों पर गंभीर सवाल, सोनगाड़ में ढह गई 50 मीटर दीवार

निर्माण के महज 22 दिन बाद धंसी सुरक्षा दीवार, लिम्चागाड़ में भी आरसीसी और वायरक्रेट में आया धंसाव; जांच कमेटी गठित उत्तरकाशी। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनगाड़ और लिम्चागाड़ में कराए जा रहे सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोनगाड़ में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की ओर से बनाई जा रही […]

गंगोत्री हाईवे के सुरक्षा कार्यों पर गंभीर सवाल, सोनगाड़ में ढह गई 50 मीटर दीवार
निर्माण के महज 22 दिन बाद धंसी सुरक्षा दीवार, लिम्चागाड़ में भी आरसीसी और वायरक्रेट में आया धंसाव; �

गंगोत्री हाईवे के सुरक्षा कार्यों पर गंभीर सवाल, सोनगाड़ में ढह गई 50 मीटर दीवार

उत्तरकाशी। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनगाड़ और लिम्चागाड़ में जारी सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सोनगाड़ में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) द्वारा बनाई गई सुरक्षा दीवार का लगभग 50 मीटर हिस्सा धंसकर नदी में बह गया। इसी प्रकार, लिम्चागाड़ में भी आरसीसी और वायरक्रेट सुरक्षा दीवार में धंसाव की घटनाएँ हुई हैं। इन घटनाओं के बाद, स्थानीय निवासियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की तकनीकी जांच की मांग की है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh

कम शब्दों में कहें तो, गंगोत्री हाईवे पर सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता पर चिंताएँ उभरने लगी हैं, जहाँ निर्माण के महज 22 दिन बाद ही सुरक्षा दीवार में धंसाव होने के मामले सामने आए हैं। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर एक नई चिंता उत्पन्न कर दी है।

22 दिन में ही धंसने लगी सुरक्षा दीवार

स्थानीय लोगों के अनुसार, सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा हुए अभी मात्र 22 दिन ही हुए थे कि इसमें धंसाव शुरू हो गया। निर्माण के दौरान ही दीवार में दरारें नजर आई थीं, जो अब 50 मीटर हिस्से के बह जाने के साथ गंगोत्री हाईवे की सुरक्षा को एक गंभीर खतरा बना चुकी हैं।

स्थानीय निवासी राजेश रावत के अनुसार, पिछले वर्ष आई आपदा में लिम्चागाड़ का पुल बहने के साथ ही सड़क को भी बड़ा नुकसान हुआ था। सोनगाड़ के पास भी हाईवे का बड़ा हिस्सा नदी की धारा में आ गया था, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। आपदा के लगभग 10 महीनों बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों में सुरक्षा कार्य शुरू किए गए थे, लेकिन अब निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

निर्माण सामग्री और मानकों को लेकर आरोप

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि सोनगाड़ और लिम्चागाड़ में सुरक्षा दीवारों के निर्माण में बड़े पत्थरों और मिट्टी का अत्यधिक उपयोग किया गया है। उनका कहना है कि सीमेंट का सही उपयोग नहीं किया गया और कुछ स्थानों पर सिर्फ बाहरी सतह को मजबूत दिखाने का प्रयास किया गया है। यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप होता, तो इतनी छोटी अवधि में दीवारों का धंसना संभव नहीं था।

ग्रामीणों ने जांच कराने की मांग की है और लापरवाही पाई जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

लिम्चागाड़ में भी धंसाव से बढ़ी चिंता

सोनगाड़ के साथ ही लिम्चागाड़ में भी सुरक्षा कार्यों के धंसाव ने स्थानीय निवासियों की चिंता को बढ़ा दिया है। यहां हाईवे से लगभग 100 मीटर नीचे बनाई गई आरसीसी दीवार और वायरक्रेट में भी धंसाव की घटनाएं दिख रही हैं। स्थानीय निवासियों को आशंका है कि अगर समय रहते इसका मरम्मत और सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सड़क की स्थिरता पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क के नीचे की जमीन खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सुरक्षा दीवारों में हुआ धंसाव हाईवे पर गुजरने वाले वाहनों के लिए भी अत्यधिक जोखिम उत्पन्न कर सकता है।

बीआरओ ने गठित की जांच कमेटी

इस मामले को लेकर बीआरओ के कमांडर राजकिशोर ने जानकारी दी है कि सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार के गिरने की सूचना आई है। संबंधित मामले में जांच के लिए एक कमेटी गठित की जा रही है। यदि निर्माण कार्य में लापरवाही पाई गई, तो उस पर संबंधित कार्रवाई की जाएगी।

गंगोत्री हाईवे पर सुरक्षा कार्यों के जल्दी प्रभावित होने से अब स्थानीय लोगों की नजर जांच कमेटी की रिपोर्ट पर है। उनका मानना है कि पहाड़ी क्षेत्र में सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।

स्थानीय निवासियों की चिंता केवल आंशिक नहीं, बल्कि यह उनके जीवन और सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में सरकार और संबंधित राजनीतिक तत्वों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।

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सादर, टीम धर्म युद्ध