जीआईसी ढोकाने में मनाया गया लोक संस्कृति दिवस - एक शानदार उत्सव

धूमधाम से मनाई गई स्व० इंद्रमणि बडोनी की जयंती सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज ढोकाने में ‘उत्तराखंड के गांधी’ के नाम से विख्यात स्व० इंद्रमणि बडोनी के जन्म दिवस को लोक संस्कृति दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक झोड़ा नृत्य और […] The post जीआईसी ढोकाने में ‘लोक संस्कृति दिवस’ की धूम appeared first on Creative News Express | CNE News.

जीआईसी ढोकाने में मनाया गया लोक संस्कृति दिवस - एक शानदार उत्सव
धूमधाम से मनाई गई स्व० इंद्रमणि बडोनी की जयंती सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। पीएम श्री अटल उत्कृष�

जीआईसी ढोकाने में मनाया गया लोक संस्कृति दिवस - एक शानदार उत्सव

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कम शब्दों में कहें तो, जीआईसी ढोकाने में स्व० इंद्रमणि बडोनी की जयंती को लोक संस्कृति दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन हुआ।

सुयालबाड़ी से मिली जानकारी के अनुसार, पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज ढोकाने में 'उत्तराखंड के गांधी' के नाम से विख्यात स्व० इंद्रमणि बडोनी की जयंती को एक अद्भुत उत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक झोड़ा नृत्य प्रस्तुत किया, जोकि इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

समारोह का महत्व

स्व० इंद्रमणि बडोनी की जयंती केवल एक समारोह नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने और संजोने का एक प्रयास है। उन्होंने अपने समर्पण और कार्यों से कई लोगों को प्रेरित किया है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने उनके योगदान और विचारों को याद करते हुए सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया।

पारंपरिक नृत्य और संगीत का प्रदर्शन

इस समारोह में पारंपरिक झोड़ा नृत्य के साथ ही विभिन्न लोक गीतों का भी गायन किया गया। नृत्य के दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न रंग-बिरंगे परिधानों में अपने लोक संस्कृति की खूबसूरती को दर्शाया। इस प्रकार के आयोजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते, अपितु ये सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का माध्यम भी हैं।

समुदाय की भागीदारी

इस महान अवसर पर शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने भी भाग लिया। समारोह की रौनक बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने दिल से भागीदारी की। यह स्पष्ट था कि यह आयोजन केवल विद्यालय परिवार के लिए नहीं था, बल्कि सभी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था।

निष्कर्ष

सम्पूर्ण समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी संस्कृति और परंपराएँ न केवल जीवित हैं, बल्कि इनका जश्न मनाना भी हमारे लिए आवश्यक है। स्व० इंद्रमणि बडोनी की जयंती को 'लोक संस्कृति दिवस' के रूप में मनाना इस बात का संकेत है कि हम अपने लोक नायकों को याद करते हुए अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अंत में, हम सभी को इस तरह के आयोजनों में भाग लेना चाहिए ताकि हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को न केवल संजोएं, बल्कि उसे आगे बढ़ाने में भी योगदान दें।

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सादर,
टीम धर्म युद्ध
- काजल शर्मा