देहरादून-मसूरी मार्ग पर लैंडस्लाइड का बढ़ता खतरा: ULMMC द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षा उपायों की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के बीच देहरादून-मसूरी मार्ग पर भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष भारी बारिश से इस महत्वपूर्ण मार्ग को हुए नुकसान के बाद इस बार भी कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आने से प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की चिंता बढ़ गई […]

देहरादून-मसूरी मार्ग पर लैंडस्लाइड का बढ़ता खतरा: ULMMC द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षा उपायों की तैयारी
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के बीच देहरादून-मसूरी मार्ग पर भूस्खलन का ख�

देहरादून-मसूरी मार्ग पर लैंडस्लाइड का बढ़ता खतरा: ULMMC द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षा उपायों की तैयारी

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कम शब्दों में कहें तो: देहरादून-मसूरी मार्ग पर भूस्खलन का खतरा बढ़ने से प्रशासन ने ULMMC से अध्ययन कराकर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है, सुरक्षा कार्य की तैयारी चल रही है।

देहरादून। उत्तराखंड की मानसूनी बारिश ने स्थितियों को गंभीर बना दिया है, विशेषकर देहरादून-मसूरी मार्ग के लिए। पहाड़ों से गिरते मलबे और भूस्खलन की घटनाओं ने इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात को बाधित करने की चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं। पिछले वर्ष की भयंकर बारिश के बाद इस साल भी भूस्खलन की चिंताजनक घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

महत्वपूर्ण मार्ग के खतरे में आना

इस मार्ग पर कई बार मलबा और पत्थर गिरने के कारण यातायात रोकना पड़ा है। ऐसे में, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) से सहायता लेने का निर्णय लिया। पहले चरण के अध्ययन में यह सामने आया कि मार्ग पर तीन से चार क्षेत्र भूस्खलन के लिए संभावित_ZONE_ माने गए हैं, जो गंभीर जलवायु परिवर्तन और भूस्खलन जैसी घटनाओं की चपेट में हैं। इन स्थानों पर पानी का रिसाव और ढलानों की कमजोर स्थिति भविष्य में और बड़े हादसों का कारण बन सकती है।

सुरक्षा उपायों की प्राथमिकताएँ

ULMMC द्वारा चिन्हित किए गए संवेदनशील स्थलों में से एक क्षेत्र में सुरक्षा कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने, ढलानों को स्थिर करने और वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सख्त आवश्यकता है। विभाग ने USDA की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होते ही स्थायी सुरक्षा कार्यों की शुरुआत करने का आश्वासन दिया है।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा है कि ULMMC की विशेषज्ञ रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद सभी ज़रूरी कार्य देश-प्रदेश की सुरक्षा के लिए किए जाएंगे, ताकि भविष्य में भारी बारिश के असर को कम किया जा सके।

भविष्य में होने वाली संभावनाएँ

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार के अनुसार, पहाड़ियों पर जल दबाव की वजह से पिछले दो वर्षों में हुए नुकसान की चिंताएँ वाजिब हैं। मौसम की तीव्रता के कारण भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ रही हैं। अधिक बर्फबारी और बारिश का सीधा असर यात्रा करने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है, विशेषकर उन हजारों पर्यटकों पर जो हर साल मसूरी पहुंचते हैं।

भूस्खलन से रोकथाम के उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में समय पर वैज्ञानिक उपाय और जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयास आवश्यक हैं। बारिश के दौरान सड़क की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपायों की आवश्यकता है ताकि यातायात सामान्यतया जारी रह सके।

इन हालातों में, यह आवश्यक है कि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी और लोक निर्माण विभाग सक्रियता से इन खतरों का सामना करें। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए उचित सुरक्षा कार्यों का समय पर निष्पादन होना चाहिए।

सुरक्षा उपायों के परिणामों और अगले कदमों की जानकारी के लिए, अधिक अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं: धर्म युद्ध.

सम्पर्क करने के लिए: राधिका शर्मा
टीम धर्म युद्ध