धौलास भूमि विवाद: भूखण्ड धारकों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, भ्रामक खबरों का किया विरोध
देहरादून के मौजा धौलास स्थित खाता संख्या 531 में शेखुल हिन्द एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा विक्रय की गई भूमि को लेकर सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय समाचार चैनलों पर प्रसारित कथित भ्रामक खबरों के विरोध में भूखण्ड धारकों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। भूखण्ड धारकों का कहना है कि भूमि के संबंध में जानबूझकर […] The post धौलास भूमि विवाद: भूखण्ड धारकों ने सौंपा ज्ञापन, भ्रामक खबरों का किया कड़ा खंडन appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
धौलास भूमि विवाद: भूखण्ड धारकों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, भ्रामक खबरों का किया विरोध
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के मौजा धौलास में भूखण्ड धारकों ने सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों द्वारा फैलाई गई भ्रामक खबरों के खिलाफ प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। इन भूखण्ड धारकों का कहना है कि यह खबरें उनके लिए सामाजिक और आर्थिक संकट पैदा कर रही हैं।
देहरादून के मौजा धौलास स्थित खाता संख्या 531 में शेखुल हिन्द एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा विक्रय की गई भूमि को लेकर भूखण्ड धारकों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। भूखण्ड धारकों ने आरोप लगाया है कि जानबूझकर गलत और भड़काऊ सूचनाएं फैलाई जा रही हैं, जिससे उनकी सामाजिक छवि और निवेश पर संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञापन की मुख्य बातें
ज्ञापन में बताया गया कि उपरोक्त भूमि पर लगभग 165 व्यक्तियों ने अपने जीवनभर की जमा पूंजी निवेश कर छोटे-छोटे भूखण्ड खरीदे हैं। इनमें अधिकांश उत्तराखंड के मूल निवासी और कई पूर्व सैनिक शामिल हैं। भूखण्ड धारकों का स्पष्ट कहना है कि सभी क्रेता हिंदू समुदाय से हैं और क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने का आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन है।
भूखण्ड धारकों ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि क्रय से पूर्व उन्होंने परगनाधिकारी, तहसीलदार और लेखपाल सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों से विधिवत जानकारी प्राप्त की थी। अधिकारियों द्वारा इस भूमि को सभी प्रकार के वाद-विवाद से मुक्त तथा संक्रमणीय अधिकारों वाली कृषि भूमि बताया गया था। इससे जुड़े कई राजस्व अभिलेखों में पूर्व स्वामियों का नाम नियमानुसार संक्रमणीय भूमिधर श्रेणी-1(क) में दर्ज है।
भ्रष्टाचार का आरोप और उपाय
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पूर्व स्वामी संस्था ने सरकार की अनुमति से ही भूमि का विक्रय किया था। फिर भी, कुछ स्थानीय लोग नकारात्मक भावनाएं प्रदर्शित कर रहे हैं जिससे निवेशकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। भूखण्ड धारकों ने प्रशासन से निवेदन किया है कि यदि भूमि के संबंध में कोई भी जांच या कदम उठाया जाए, तो उन्हें उचित सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए।
महादेव रेजीडेंसी की सीमांकन
वर्तमान में उक्त भूमि खुले भूखण्ड के रूप में है, जहाँ कोई आवासीय निर्माण या गतिविधि नहीं चल रही है। सभी 165 भूखण्ड धारकों ने इसे सामूहिक रूप से “महादेव रेजीडेंसी” के नाम से सीमांकित किया है, जिसके लिए विभागीय एवं राजस्व स्तर की अनापत्ति भी मौजूद है।
भूखण्ड धारकों ने साफ किया है कि वे पूरी जिम्मेदारी से भूमि के विक्रय में शामिल हैं और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की गई हैं। प्रशासन से उनका यह आग्रह है कि बिना किसी पूर्वाग्रह के सभी मामलों की जांच की जाए ताकि किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।
अंत में, भूखण्ड धारकों ने स्थानीय मीडिया से भी निवेदन किया है कि वे कथित भ्रामक खबरें प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। इससे न केवल समाज की एकता बनी रहेगी, बल्कि निवेशकों की सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।
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Team Dharm Yuddh—राधिका शर्मा