रुद्रपुर जिला अस्पताल: जच्चा-बच्चा वार्ड या मौत का अड्डा? जनता का आक्रोश फूटा!

प्रसव के दौरान महिला की मौत के बाद हंगामा, डॉक्टर गायब… ऑक्सीजन तक नहीं मिली ! जिला अस्पताल पर लापरवाही, डराने और रेफर रैकेट के गंभीर आरोप एफएनएन, रुद्रपुर : Rudrapur District Hospital एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस अस्पताल को गरीबों की जिंदगी बचाने का सहारा माना जाता है, वहीं अब […]

रुद्रपुर जिला अस्पताल: जच्चा-बच्चा वार्ड या मौत का अड्डा? जनता का आक्रोश फूटा!
प्रसव के दौरान महिला की मौत के बाद हंगामा, डॉक्टर गायब… ऑक्सीजन तक नहीं मिली ! जिला अस्पताल पर लापर

रुद्रपुर जिला अस्पताल: जच्चा-बच्चा वार्ड या मौत का अड्डा?

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कम शब्दों में कहें तो: प्रसव के दौरान एक महिला की मौत ने रुद्रपुर जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था का पर्दाफाश किया है। चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप और ऑक्सीजन की अनुपलब्धता ने लोगों में आक्रोश पैदा किया है।

एफएनएन, रुद्रपुर: रुद्रपुर जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जो अस्पताल गरीबों के लिए जीवनदायिनी माना जाता था, वह अब लोगों के लिए आतंक का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर तक मौजूद नहीं थे, और प्रसव का कार्य नर्सों के भरोसे चल रहा था। जब महिला की स्थिति बिगड़ी, तब ऑक्सीजन तक समय पर उपलब्ध नहीं हो सका।

घटना का ब्यौरा

30 वर्षीय ज्योति, जो सितारगंज के शक्तिफार्म निवासी हैं, को सोमवार शाम करीब 8 बजे रुद्रपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को पूरी उम्मीद थी कि सरकारी अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी होगी। लेकिन अस्पताल की अव्यवस्थाओं ने उनकी आशा को मातम में बदल दिया। आरोप है कि प्रसव के समय ना तो कोई डॉक्टर मौजूद थे और ना ही अस्पताल प्रशासन ने समस्या को गंभीरता से लिया।

परिजनों के अनुसार, जब महिला की हालत बिगड़ी तो अस्पताल प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ऑक्सीजन सिलेंडर हासिल करने में हो रही देरी ने महिला को तड़पने पर मजबूर कर दिया, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। सीधी बात ये है कि अस्पताल के प्रबंधन की लापरवाही और नासमझी ने इस घटनाक्रम को जन्म दिया।

स्थानीय लोगों का गुस्सा

महिला की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। पूर्व विधायक नारायण पाल और अर्जुन विश्वास सहित कई स्थानीय नेता मौके पर पहुंचे और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आवाज उठाई। लोगों का सवाल है कि आखिर जच्चा-बच्चा वार्ड का संचालन कौन कर रहा है? क्या डॉक्टर की अनुपस्थिति में केवल नर्सिंग स्टाफ पर निर्भर रहना उचित है?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिला अस्पताल लंबे समय से खस्ताहाल है। मरीजों के साथ मानवता के बजाय जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को डराया जाता है। कभी कहते हैं कि बच्चा उल्टा है, कभी कहते हैं कि हालत गंभीर है, जिसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर धकेला जाता है।

रेफर रैकेट का खुलासा

जिला अस्पताल में रेफर रैकेट का खेल खुलेआम चल रहा है। मरीजों के लिए बहाने बनाए जाते हैं जैसे "यहां सुविधा नहीं है", "डॉक्टर नहीं हैं", और "प्राइवेट में दिखाइए"। ऐसे बहाने गरीब मरीजों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि यदि जिला अस्पताल में इलाज और प्रसव सुरक्षित नहीं है, तो करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या औचित्य है?

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप और भविष्य की संभावना

महिला की मौत के बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की एक पैनल गठित करने और वीडियोग्राफी के माध्यम से जांच कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, लोगों का सवाल है कि क्या इस जांच के बाद केवल फाइलें चलेंगी, या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई होगी?

लाइन: "जब अस्पताल में डॉक्टर नहीं, ऑक्सीजन नहीं और जिम्मेदारी नहीं… तो आखिर गरीब जाए कहां?"

रुद्रपुर जिला अस्पताल एक बार फिर से एक ज्वलंत मुद्दा बन चुका है, जिसे गंभीरता से देखने की आवश्यकता है। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को चुनौती दी है, बल्कि समाज में एक बड़ी चिंता का विषय भी बना दिया है।

जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार लाने के लिए हमें एकजुटता से कदम उठाने की आवश्यकता है। अभी भी समय है कि हम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, सरकारी घोषणाओं और अस्पताल प्रबंधन के समुचित क्रियान्वयन पर ध्यान दें। स्वस्थ समाज की नींव मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं पर होती है।

अत्यधिक महत्वपूर्ण यह है कि सभी स्तरों पर हमें ठोस सुधारों की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

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सादर, टीम धर्म युद्ध