संसद में VB-G RAM-G बिल की मंजूरी: टीएमसी सांसदों का कंबल बिछाकर धरना, गांधीजी के अपमान का आरोप
VB-G RAM-G Bill Pass In Parliament: संसद के शीतकालीन सत्र के खत्म होने के 24 घंटे पहले दोनों सदनों (लोकसभा
VB-G RAM-G बिल का संसद में पास होना: नया विवाद
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कम शब्दों में कहें तो, संसद के शीतकालीन सत्र के समापन से 24 घंटे पहले, VB-G RAM-G बिल को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में मंजूरी मिल गई है। लेकिन इस निर्णय का विरोध भी तेज हो गया है। टीएमसी सांसदों ने कंबल बिछाकर संसद की सीढ़ियों पर रातभर धरना दिया, जहां उन्होंने इस बिल को महात्मा गांधी का अपमान करार दिया।
क्या है VB-G RAM-G बिल?
VB-G RAM-G बिल को सरकार ने सामाजिक और आर्थिक विकास के नाम पर प्रस्तुत किया है। इसमें मुख्यत: उन योजनाओं का वर्णन है जिनका उद्देश्य देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। सरकार का तर्क है कि ये योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति देगी और जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाएगी।
टीएमसी का विरोध
टीएमसी सांसदों का कहना है कि इस बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं जो महात्मा गांधी के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। यह धरना संसद के बाहर हुआ, जहां सांसदों ने गांधीजी के अनमोल विचारों का स्मरण करते हुए बिल के प्रावधानों की न्यायिकता पर सवाल उठाए। टीएमसी सांसदों ने कहा कि यह बिल केवल राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है और इसका सामाजिक आधार बहुत कमजोर है।
संसद का शीतकालीन सत्र
भारत की संसद का शीतकालीन सत्र हर साल दिसंबर में आयोजित होता है और इसमें विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है। इस बार का सत्र कई विवादों से भरा रहा और VB-G RAM-G बिल का पास होना भी उसी का हिस्सा है। टीएमसी सांसदों का धरना इस बात का संकेत है कि राजनीति में विचारों का टकराव बढ रहा है और इसका असर चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक टिप्पणी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बिल के पास होने के पीछे केंद्र सरकार का चुनावी दृष्टिकोण है। यह बिल आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लाया गया है। ऐसे में टीएमसी सांसदों का धरना केवल एक प्रतीकात्मक कदम है, लेकिन यह दर्शाता है कि कैसे विभिन्न राजनीतिक दल अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
निष्कर्ष
VB-G RAM-G बिल का पास होना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल सरकार की नीतियों का प्रतिबिंब है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को भी उजागर करता है। आने वाले समय में, इस बिल का असर ना सिर्फ चुनावी परिणामों पर, बल्कि ग्रामीण विकास और सामाजिक समानता पर भी देखने को मिलेगा। इसके साथ ही, टीएमसी का धरना यह बताता है कि विपक्षी दल कितने संवेदनशील हैं और वे अपनी आवाज राष्ट्रपति सदन के बाहर भी उठाने के लिए तैयार हैं।
आप इस विषय पर और जानकारी के लिए धर्म युद्धसादर,
टीम धर्म युद्ध
(राधिका शर्मा)