उत्तराखंड में शराब की कीमतों में वृद्धि: वित्त विभाग के आपत्ति के बाद 50-100 रुपये की बढ़ोतरी
देहरादून: नए वित्तीय वर्ष की आबकारी नीति को लेकर सरकार भले ही 5060 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व हासिल करने के दावे कर रही थी, लेकिन वित्त वर्ष खत्म होने से 04 माह पहले ही बड़ी बाधा सामने आ गई है। एक्साइज ड्यूटी को वैट से बाहर रखने के फैसले पर वित्त विभाग ने कड़ा […] The post उत्तराखंड में शराब महंगी: आबकारी पर वित्त विभाग की आपत्ति से बदला फैसला, कीमतें 50-100 रुपये बढ़ीं appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
उत्तराखंड में शराब की कीमतों में वृद्धि: वित्त विभाग के आपत्ति के बाद 50-100 रुपये की बढ़ोतरी
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में शराब की कीमतें बढ़ गई हैं क्योंकि वित्त विभाग की आपत्ति के बाद आबकारी नीति में संशोधन किया गया है। अब प्रति बोतल कीमतें 50 से 100 रुपये तक बढ़ गई हैं।
देहरादून: नए वित्तीय वर्ष (2025-26) की आबकारी नीति को लेकर राज्य सरकार ने 5060 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व अर्जित करने का दावा किया था। लेकस, वित्त वर्ष खत्म होने से महज 4 महीने पहले, वित्त विभाग ने इस अभिप्राय को चुनौती दी, जिससे राज्य की सरकार को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा।
आबकारी नीति में बदलाव के कारण
बीते दिनों की राज्य सरकार की योजना में एक्साइज ड्यूटी को वैट के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया गया था। राज्य सरकार का तर्क था कि यह कदम राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए था। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी एक्साइज पर वैट नहीं है। हालांकि, वित्त विभाग ने इस निर्णय को अस्वीकार करते हुए इस विषय पर कई बार आपत्ति जताई। इसके परिणामस्वरूप, आबकारी विभाग ने अब एक्साइज ड्यूटी पर 12 प्रतिशत वैट लगाने का निर्णय लिया है। अब इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ा है, जिससे शराब की कीमत बढ़ गई है।
गिरती बिक्री की चिंता
भड़कती कीमतों से अब विभाग को बिक्री में गिरावट का डर सताने लगा है। उत्तराखंड एक पर्यटन पर निर्भर राज्य है, जहाँ शराब की संतुलित कीमतें उसके बाजार में स्थिरता बनाए रखती हैं। परंतु, अब बढ़ती कीमतों के कारण, यहाँ शराब पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगी हो गई है। जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि पर्यटक अधिकतम अनुमन्य कोटा लेकर आएंगे, और इससे स्थानीय बिक्री प्रभावित होगी।
राजस्व लक्ष्य टूटा
आबकारी विभाग का पहले का अनुमान था कि इस वित्तीय वर्ष में उनका राजस्व लक्ष्य 700 करोड़ रुपये से अधिक होगा। लेकिन अब वैट लगाने के बाद, उसे मात्र 50 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है। विभाग में अब भी 25 लाख पेटियों की बिक्री का लक्ष्य बाकी है। यदि मांग पर असर पड़ा, तो विभाग को संभावित रूप से 250 करोड़ रुपये की राजस्व कमी का जोखिम दिखाई दे रहा है।
राज्य की आबकारी नीति पर इस बदलाव के पीछे सरकार का विचार यह था कि यह निर्णय तस्करी पर नियंत्रण और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने में सहायक होगा। लेकिन अब, इस बदलाव के प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
अतः, अब देखते हैं कि सरकार इस स्थिति से कैसे निपटेगी और क्या इससे उत्तराखंड के आर्थिक आंकड़े प्रभावित होंगे। अधिक जानकारी के लिए, हमारी वेबसाइट पर विजिट करें: dharmyuddh.com.
— टीम धर्म युद्ध