उत्तराखंड सरकार का नया हेलीकॉप्टर खरीद में देरी, किराए पर उड़ान की लागत 130 करोड़ रुपये तक पहुंची
एफएनएन, देहरादून : Uttarakhand सरकार का नया सरकारी हेलीकॉप्टर खरीदने का प्रस्ताव अब तक फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस बीच राज्य सरकार मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी दौरों के लिए फिलहाल किराए के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण जिस हेलीकॉप्टर को कुछ वर्ष पहले करीब 80 से […]
उत्तराखंड सरकार का नया हेलीकॉप्टर खरीद में देरी, किराए पर उड़ान की लागत 130 करोड़ रुपये तक पहुंची
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार अभी तक नया सरकारी हेलीकॉप्टर नहीं खरीद पाई है और मुख्यमंत्री के दौरे के लिए किराए पर हेलीकॉप्टर उड़ाने पर मजबूर है। राज्य में हेलीकॉप्टर की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं।
एफएनएन, देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने नया सरकारी हेलीकॉप्टर खरीदने का जो प्रस्ताव रखा था, वह अब तक फाइलों में ही कैद हो गया है। इस बीच, राज्य सरकार को मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी दौरों के लिए किराए के हेलीकॉप्टर का सहारा लेना पड़ रहा है। दरअसल, कुछ वर्षों पहले जिस हेलीकॉप्टर को करीब 80 से 90 करोड़ रुपये में खरीदा जा सकता था, उसकी अनुमानित कीमत अब बढ़कर लगभग 130 करोड़ रुपये तक जा पहुंची है।
पुराना हेलीकॉप्टर और उसकी तकनीकी समस्याएं
राज्य का मौजूदा सरकारी हेलीकॉप्टर वर्ष 2003 से सेवा में है और अब लगभग 23 साल पुराना हो चुका है। लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों और वीआईपी यात्राओं में इसका इस्तेमाल होने के कारण इससे जुड़ी कई तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होने लगी हैं। कई बार इसके महत्वपूर्ण पुर्जों के खराब होने के कारण उन्हें विदेश से मंगवाना पड़ा, जिससे हेलीकॉप्टर लंबे समय तक सेवा से बाहर रहा और इस कारण कई सरकारी कार्यक्रम भी प्रभावित हुए हैं।
किराए पर लिया गया आधुनिक हेलीकॉप्टर
इन मुश्किल परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने हाल के महीनों में एक निजी कंपनी से एक आधुनिक हेलीकॉप्टर किराए पर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह हेलीकॉप्टर सुरक्षा और तकनीक के मामले में बेहतर विकल्प है।
किराए की महंगी उड़ानें
यूकाडा के ACEO संजय टोलिया ने बताया कि किराए पर हेलीकॉप्टर लेना महंगा जरूर है, लेकिन इस वक्त यही व्यावहारिक विकल्प है। उन्होंने जानकारी दी कि कंपनियां औसतन 4 लाख रुपये प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क लेती हैं, जिसमें पायलट और अन्य परिचालन खर्च भी शामिल होते हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि समय पर नया हेलीकॉप्टर नहीं खरीदने के कारण राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। पार्टी के प्रतिनिधियों का कहना है कि निर्णय में देरी के चलते हेलीकॉप्टर की कीमत में 35 से 40 करोड़ रुपये की वृद्धि हो चुकी है।
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार सुरक्षा और जरूरतों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेगी। उनका तर्क है कि पहले स्वास्थ्य कारणों से खरीद नहीं करने से सरकार ने कई वर्षों तक बड़ी राशि भी बचाई है और अब अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर की खरीद पर विचार किया जा रहा है।
नई हेलीकॉप्टर की खरीद की समय सीमा
जानकारी के अनुसार, नए हेलीकॉप्टर की खरीद के बाद उसकी डिलीवरी में लगभग दो वर्ष का समय लगता है। साथ ही, पायलट और तकनीकी स्टाफ पर हर साल 2 से 3 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च भी आता है। इस वक्त माना जा रहा है कि नए हेलीकॉप्टर की खरीद को लेकर अंतिम फैसला चुनाव के बाद लिया जा सकता है।
चूंकि राज्य में हेलीकॉप्टर की आवश्यकता और उनकी कीमतों में वृद्धि हो रही है, यह स्थिति सरकारी वित्तीय प्रबंधन के लिए एक चुनौती बन सकती है। अधिक अपडेट के लिए हमारे पोर्टल पर जाएं.
स्वाति शर्मा
टीम धर्म युद्ध