कर्नाटक के CM सिद्धारमैया ने मोदी सरकार पर लगाया हिंदी थोपने का आरोप, कहा- कन्नड़ भाषा की उपेक्षा से प्रभावित हो रही बच्चों की प्रतिभा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को राज्योत्सव दिवस के मौके पर केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने
कर्नाटक के CM सिद्धारमैया ने मोदी सरकार पर लगाया हिंदी थोपने का आरोप
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कम शब्दों में कहें तो, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जबरन हिंदी भाषा को थोप रही है। इस स्थिति ने कन्नड़ भाषा की उपेक्षा की ओर इशारा किया है, जिसके कारण बच्चों की प्रतिभा को नुकसान पहुंचने का ख़तरा है।
राज्योत्सव दिवस पर मुख्यमंत्री का बयान
शनिवार को कर्नाटक में राज्योत्सव दिवस के अवसर पर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक समारोह के दौरान केंद्र सरकार पर तीख़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों के चलते हिंदी और अंग्रेजी पर जोर दिया जा रहा है, जिससे कन्नड़ भाषा और इसके सिखने में रुचि रखने वाले बच्चों की प्रतिभा में कमी आ रही है।
कन्नड़ भाषा की महत्ता
सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि कन्नड़ केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। जब हम अपनी मातृभाषा को महत्व नहीं देते हैं, तो हमारी संस्कृति कमजोर होती है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह कन्नड़ भाषा को प्रोत्साहित करें और इसका सही सम्मान दें।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह आरोप विचारणीय है, क्योंकि भारतीय भाषाओं का संरक्षण और प्रोत्साहन हर नागरिक का हक़ होना चाहिए।
भाषाई विविधता का संकट
कर्नाटक के मुख्यमंत्री का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत की भाषाई विविधता को बनाए रखने के लिए गंभीर प्रयास की आवश्यकता है। राज्यों को अपनी स्थानीय भाषाओं को सहेजने और प्रोत्साहन देने का काम करना चाहिए।
क्या कर सकते हैं हम?
अगर हम अपनी मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हमें बच्चों को छोटी उम्र से ही अपनी भाषा सिखानी होगी। इससे न केवल उनकी भाषा की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वे अपनी संस्कृति को भी पहचान सकेंगे।
आगे बढ़ते हुए, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी भाषाई सांस्कृतिक विविधता को नुकसान न पहुंचे। इसके लिए हमें अपनी भाषा को प्रोत्साहित करने वाले पाठ्यक्रमों को विकसित करना चाहिए और शिक्षण संस्थानों में इसे शामिल करना चाहिए।
अंत में, यह कहना उचित होगा कि केंद्र सरकार को इस मामले में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि सभी भारतीय भाषाओं को एक समान महत्व मिल सके। इससे न केवल बच्चों की प्रतिभा में वृद्धि होगी, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता भी संरक्षित रहेगी।
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सादर,
टीम धर्म युद्द