डीएम सविन की पहल: भिक्षा छोड़ शिक्षा की राह पर 82 बच्चे, ₹1.5 करोड़ का अत्याधुनिक केयर सेंटर शुरू

सड़क किनारे फैलाए हाथों में अब किताबें हैं, चेहरों पर उम्मीद की चमक है और आवाज़ों में आत्मविश्वास की गूंज। देहरादून जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘भिक्षा से शिक्षा की ओर’ ने भिक्षावृत्ति और बालश्रम की बेड़ियों में जकड़े 82 बच्चों को एक नई दुनिया का दरवाजा दिखा दिया है। जहां भीख नहीं, बल्कि भविष्य […] The post डीएम सविन की पहल: भिक्षा छोड़ शिक्षा की राह पर 82 बच्चे, ₹1.5 करोड़ का आधुनिक केयर सेंटर शुरू appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

डीएम सविन की पहल: भिक्षा छोड़ शिक्षा की राह पर 82 बच्चे, ₹1.5 करोड़ का अत्याधुनिक केयर सेंटर शुरू
सड़क किनारे फैलाए हाथों में अब किताबें हैं, चेहरों पर उम्मीद की चमक है और आवाज़ों में आत्मविश्वास

डीएम सविन की पहल: भिक्षा छोड़ शिक्षा की राह पर 82 बच्चे, ₹1.5 करोड़ का अत्याधुनिक केयर सेंटर शुरू

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून जिला प्रशासन की नई पहल ‘भिक्षा से शिक्षा की ओर’ ने 82 बच्चों को भिक्षावृत्ति और बालश्रम की जंजीरों से मुक्त करवाकर नई जिंदगी की राह दिखा दी है। इन बच्चों के लिए ₹1.5 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक केयर सेंटर की स्थापना की गई है, जो शिक्षा, सुरक्षा और संवेदना का संगम है।

इस पहल की अगुवाई जिलाधिकारी सविन बंसल ने की है, जिनकी गहरी रुचि हमेशा से बाल कल्याण के मुद्दों में रही है। यह केयर सेंटर देहरादून के साधूराम इंटर कॉलेज में स्थापित किया गया है, जहां बच्चों के लिए एक सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण बनाया गया है।

बदलाव की यात्रा: सड़क से स्कूल तक

डीएम सविन बंसल की देखरेख में यह अभियान दो चरणों में संचालित किया गया है। पहले चरण में 51 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में दाखिला दिया गया, जबकि दूसरे चरण में 31 बच्चों को राजकीय प्राथमिक विद्यालय परेड ग्राउंड और साधूराम इंटर कॉलेज में शिक्षा से जोड़ा गया है। यह पहल केवल बच्चों की रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में नए अवसर और आत्मसम्मान की भावना को भी शामिल करती है।

यहां पर बच्चों के लिए संगीत, योग, कला और खेल जैसे गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जो उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं को विकसित करने में मदद कर रहा है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था

हाल ही में हुई त्रैमासिक समीक्षा बैठक में, जिलाधिकारी ने जिला बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों के साथ बच्चों के पुनर्वास कार्यों की स्थिति को ध्यान में रखा। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी बालगृहों के कर्मचारियों का थानेवार सत्यापन किया जाए एवं जिन बच्चों के पास आधार, आयुष्मान कार्ड या राशन कार्ड नहीं हैं, उनके लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।

बाल संरक्षण समितियों का सक्रियता

जिलाधिकारी ने कहा कि वार्ड एवं ग्राम स्तर पर बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय किया जाएगा, ताकि बच्चों की सुरक्षा एवं कल्याण में कोई कमी न रह जाए। स्थानीय निकायों को ‘मिशन वात्सल्य’ गाइडलाइन के तहत जाकर मिलने वाले फंड का उपयोग बच्चों के कल्याण पर करने का निर्देश दिया गया।

निरंतर रेस्क्यू और पुनर्वास की प्रक्रिया

देहरादून में तीन रेस्क्यू वाहन और एक विशेष अंतरविभागीय टीम बच्चों की सुरक्षा के लिए काम कर रही है। इस टीम में पुलिस, होमगार्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, शिक्षा और श्रम विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

हालिया रेस्क्यू और कार्रवाई के आंकड़े

जुलाई से सितंबर 2025 के बीच, कुल 136 बच्चों को संरक्षण हेतु समितियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया और 138 बच्चों को मुक्त कराया गया। इनमें से 70 बच्चे भिक्षावृत्ति और 14 बच्चे बालश्रम से रेस्क्यू किए गए हैं। इसके अलावा, 6 बच्चों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया और 82 बच्चों को विभिन्न विद्यालयों में दाखिल कराया गया।

यह पहल निश्चित रूप से उन बच्चों का जीवन बदलने में मदद करेगी, जो पहले सीमित अवसरों में जी रहे थे। यह शिक्षा का पहला कदम है, जो उनके भविष्य को उज्जवल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस प्रकार, डीएम सविन बंसल ने समाज में बदलाव लाने का प्रयास किया है और अब उम्मीद है कि अन्य जिलों में भी ऐसे ही प्रयास किए जाएंगे।

फिर से कहें तो, बच्चों को उनकी प्रतिभाओं के अनुसार आगे बढ़ाने के लिए यह केयर सेंटर एक मील का पत्थर बन सकता है।

इसके अलावा, अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारे वेबसाइट पर जाएं: https://dharmyuddh.com.

सादर,
Team Dharm Yuddh