जिला प्रशासन की नई पहल: बाल संरक्षण समितियों का गठन और बच्चों की शिक्षा की दिशा में कदम
देहरादून, 24 अक्तूबर । सड़क पर भिक्षा मांगते बच्चों का बचपन अब शिक्षा, योग और संगीत की ओर मुड़ रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर जिला प्रशासन देहरादून ने ‘‘भिक्षा से शिक्षा की ओर’’ अभियान के तहत एक आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर की स्थापना की है, जहाँ रेस्क्यू किए गए बच्चों को शिक्षा […] The post जिला प्रशासन ने सक्रिय की बाल संरक्षण समितियां, भिक्षावृत्ति और बालश्रम में संलिप्त बच्चों को रेस्क्यू… appeared first on Pahadi Khabarnama पहाड़ी खबरनामा.
जिला प्रशासन की नई पहल: बाल संरक्षण समितियों का गठन और बच्चों की शिक्षा की दिशा में कदम
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में भिक्षावृत्ति और बालश्रम में संलिप्त बच्चों के लिए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
देहरादून, 24 अक्तूबर: सड़कों पर भिक्षा मांगने वाले बच्चों का जीवन अब शिक्षा, योग और संगीत के प्रति बदल रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर, जिला प्रशासन ने "भिक्षा से शिक्षा की ओर" अभियान के अंतर्गत एक अत्याधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर की स्थापना की है। इस केंद्र में रेस्क्यू किए गए बच्चों को न केवल शिक्षा दी जाएगी, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक विकास के लिए योग और संगीत की ट्रेनिंग भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
बाल संरक्षण समितियों का गठन
जिला प्रशासन ने बाल संरक्षण समिति की स्थापना का निर्णय लिया है, जो भिक्षावृत्ति और बालश्रम के शिकार बच्चों की संरक्षण और देखरेख करेगी। इन समितियों का उद्देश्य बच्चों को पुनर्स्थापित करना और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करना है। यह पहल न केवल दीर्घकालिक समाधान प्रदान करेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों में जागरूकता भी बढ़ाएगी।
पहल के अंतर्गत गतिविधियाँ
इस प्रकार के केंद्रों में बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें:
- शिक्षा: बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रदान की जाएगी ताकि वे पढ़ाई में आगे बढ़ सकें।
- योग और ध्यान: मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे।
- संगीत शिक्षा: संगीत की शिक्षा के माध्यम से बच्चों के रचनात्मक कौशल को निखारा जाएगा।
स्थानीय समुदाय की भूमिका
स्थानीय समुदाय की सहभागिता इस पहल में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बच्चों के प्रति जागरूकता फैलाने और उन्हें सही मार्ग पर चलने के लिए समुदाय के सदस्यों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों के प्रति संवेदना बढ़ाने और भिक्षावृत्ति को रोकने में मदद मिलेगी।
संभावित चुनौतियाँ
हालांकि यह पहल बेहद सकारात्मक दिखती है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियाँ भी होंगी। बच्चों के परिवारों को मनाने की जरूरत होगी कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें, न कि उन्हें काम करने मजबूर करें। इसके अलावा, वित्तीय सहायता और संसाधनों की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
क्या उम्मीद करें?
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि भिक्षावृत्ति और बाल श्रम से जुड़ते बच्चों की संख्या में कमी आएगी। बच्चों को शिक्षित करके, जिला प्रशासन उन्हें एक नई दिशा देने का प्रयास कर रहा है।
जिला प्रशासन की यह पहल सिर्फ बच्चों के जीवन को ही नहीं बदलने जा रही, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बनने जा रही है।
सभी को इस बदलाव में मदद करना चाहिए ताकि हम एक स्वस्थ और शिक्षित समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें। अधिक जानकारी के लिए, हमारे पोर्टल https://dharmyuddh.com पर जाएं।
सादर,
टीम धर्म युद्ध
(सुमन शर्मा)