देवास बैंकिंग घोटाला: चार अधिकारियों को नकली सोने पर लोन देने के लिए 5 साल की जेल

एफएनएन, देवास : आजकल सोना सुर्खियों में है. कारण इसकी आसमान छूती कीमतें. लेकिन हम इससे इतर बात कर रहे हैं नकली सोने की. देवास जिला अदालत ने निजी बैंक में हुए नकली सोना कांड के दोषी 4 बैंक अधिकारियों को 5-5 साल की सजा सुनाई है. इस मामले में 2 करोड़ से ज्यादा की […] The post बैंकिंग घोटाले में बड़ा फैसला, नकली सोने पर लोन देने वाले 4 अफसरों को 5 साल की जेल appeared first on Front News Network.

देवास बैंकिंग घोटाला: चार अधिकारियों को नकली सोने पर लोन देने के लिए 5 साल की जेल
एफएनएन, देवास : आजकल सोना सुर्खियों में है. कारण इसकी आसमान छूती कीमतें. लेकिन हम इससे इतर बात कर रह�

देवास बैंकिंग घोटाला: चार अधिकारियों को नकली सोने पर लोन देने के लिए 5 साल की जेल

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कम शब्दों में कहें तो, देवास जिला अदालत ने नकली सोने के आधार पर लोन स्वीकृत करने वाले चार बैंक अधिकारियों को 5 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस मामले में धोखाधड़ी की कुल राशि 2 करोड़ रुपये से अधिक है।

एफएनएन, देवास: सोने की आसमान छूती कीमतों ने इसे लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है, लेकिन आज हम नकली सोने के कांड की बात कर रहे हैं। देवास जिला अदालत ने यह फैसला सुनाया है कि निजी बैंक में हुई इस धोखाधड़ी के लिए चार अधिकारियों को 5-5 साल की सजा दी जाएगी। इस मामले की जांच में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

नकली सोना गिरवी रखकर लोन की स्वीकृति

इस घोटाले में शामिल चार बैंक अधिकारियों में महेन्द्र पटेल (शाखा प्रबंधक), फाल्गुनी कश्यप (मुख्य मूल्यांकनकर्ता), शैलेन्द्र शर्मा (सेल्स मैनेजर) और प्रमोद चौधरी (सेल्स ऑफिसर) शामिल हैं। इन्होंने मिलकर नकली सोने के आधार पर ऋण स्वीकृत किए और ग्राहकों को मोहरा बनाकर ऋण राशि स्वयं हड़प ली। घटना का समय 2018 से 2021 के बीच का है, जो कोविड-19 के दौरान घटित हुआ। जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में नकली सोना स्वयं बैंक कर्मचारियों द्वारा उपलब्ध कराया गया था।

फर्जी लोन दस्तावेज़ों का निर्माण

अधिवक्ता उपेंद्र सिंह चंद्रावत ने बताया, “जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के अधिकारियों ने ऋण दस्तावेज़ ग्राहकों की गैर-मौजूदगी में तैयार किए और उन पर फर्जी हस्ताक्षर किए। इस तथ्य की पुष्टि हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट से हुई थी। ग्राहकों को लोन बंद करने का झांसा दिया गया, लेकिन वास्तव में संतोषजनक राशि जमा नहीं की गई।”

देवास जिला सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि “यह अपराध सुनियोजित है और सार्वजनिक धन व बैंकिंग व्यवस्था में जनता के विश्वास को गंभीर खतरे में डालता है। इस कारण से कठोर सजा दी गई है।”

बैंक द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर

2021 में बैंक ने अपने ही ब्रांच मैनेजर और अन्य तीन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में 35 व्यक्तियों के नाम से लोन जारी किया गया था, लेकिन जब किसी भी ग्राहक ने लोन की राशि जमा नहीं की, तब कंपनी ने आभूषणों को नीलाम करने की योजना बनाई।

नीलामी से पहले जब इनकी वैल्यूएशन करवाई गई, तो कंपनी अधिकारियों के होश उड़ गए। क्योंकि सभी गहने नकली निकले। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया और आरोपियों की जमानत याचिका दो बार खारिज की। कोर्ट ने प्रकरण का निराकरण तय समय सीमा में करने के लिए निर्देश दिया था।

निष्कर्ष

देवास बैंकिंग घोटाले ने एक बार फिर हमें यह याद दिलाया है कि किसी भी क्षेत्र में धोखाधड़ी के मामलों की गंभीरता को समझना कितना आवश्यक है। बैंकिंग प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट का यह निर्णय ऐसे मामलों में एक मिसाल सेट करेगा, जहां पारदर्शिता और न्याय की आवश्यकता हो।

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Signed off by: Team Dharm Yuddh - Priya Sharma