बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण समाज में विवादास्पद- हरीश रावत की प्रतिक्रिया

एफएनएन, उत्तराखंड : तहरीक मुस्लिम शब्बन के ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद मेमोरियल और वेलफेयर इंस्टीट्यूशन बनाने के ऐलान के बाद इस पर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. ये फैसला मस्जिद गिराए जाने की 33वीं बरसी पर बाद लिया गया. अब इसे लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बयान सामने आया […] The post बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण समाज स्वीकार नहीं करेगा- रावत appeared first on Front News Network.

बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण समाज में विवादास्पद- हरीश रावत की प्रतिक्रिया
एफएनएन, उत्तराखंड : तहरीक मुस्लिम शब्बन के ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद मेमोरियल और वेलफेयर �

बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण समाज में विवादास्पद- हरीश रावत की प्रतिक्रिया

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बाबरी मस्जिद मेमोरियल और वेलफेयर इंस्टीट्यूशन के निर्माण को लेकर की गई घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण समाज स्वीकार नहीं करेगा।

उत्तराखंड : हाल ही में तहरीक मुस्लिम शब्बन द्वारा ग्रेटर हैदराबाद में बाबरी मस्जिद मेमोरियल और वेलफेयर इंस्टीट्यूशन बनाने की घोषणा की गई। यह निर्णय बाबरी मस्जिद के गिराए जाने की 33वीं बरसी पर लिया गया, जिससे राजनीति और समाज में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। इस बहस में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले पर चुप्पी नहीं साधी।

हरीश रावत की आपत्ति परिभाषित करती है नागरिक अधिकार

एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए रावत ने कहा, "चुनाव के समय जब हम अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए ऐसे कदम उठाते हैं, तो इससे समाज में ध्रुवीकरण होता है, जो राष्ट्रहित में नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर या मस्जिद बनाने का कार्य नागरिक अधिकार हो सकता है, लेकिन समाज का ध्रुवीकरण करना नागरिक कर्तव्य का दुरुपयोग है।

बाबर के नाम पर मस्जिद को नहीं करेंगे स्वीकार

रावत ने स्पष्ट रूप से कहा कि "बाबर एक आक्रांता था। उसके नाम पर मस्जिद का निर्माण करना इस तरीके की कोशिशों को कोई भी समाज स्वीकार नहीं करेगा। चाहे वह नमाजी समाज हो या आरती करने वाला समाज हो, किसी भी समाज को ऐसा प्रयास स्वीकार नहीं करना चाहिए।" यह विचार विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो सामाजिक सद्भाव को बचाए रखने के पक्षधर हैं।

उनका कहना है कि "प्रबुद्ध जनमत को इस प्रयास के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए" और राजनीतिक ध्रुवीकरण के प्रयासों की निंदा करनी चाहिए। रावत का यह बयान दर्शाता है कि समाज में संवेदनशील मुद्दों से निपटने के लिए एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होना कितना आवश्यक है।

बाबरी मस्जिद मामला और इसका सामाजिक प्रभाव

बाबरी मस्जिद मामला भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद मुद्दा रहा है। यह न केवल विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच टकराव का कारण बना है, बल्कि इसने राजनीतिक लहरें भी उत्पन्न की हैं। बाबरी मस्जिद के गिराए जाने के बाद से इस विषय पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आई हैं। रावत का यह बयान उस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जहां विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहिष्णुता की आवश्यकता है।

इस मुद्दे पर विचार करते हुए, हमें यह समझने की आवश्यकता है कि किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक का निर्माण सिर्फ एक स्थान नहीं है, बल्कि वह समुदाय के सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करता है।

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सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए हमें संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें सभी धाराओं का सम्मान हो। हरीश रावत की प्रतिक्रिया इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

हमें इससे सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए और समाज में सहयोग एवं सद्भावना को बढ़ावा देना चाहिए।

भविष्य में ऐसे मुद्दों पर प्रभावी संवाद और सहिष्णुता की आवश्यकता है ताकि समाज में शांति और स्थिरता बनी रहे।

सादर, टीम धर्म युद्ध
सुमिता verma