बाल स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सिरप पर नजर रखें: स्वास्थ्य विभाग की अनोखी अपील

देहरादून। औषधि विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी जिलों में छापेमारी के सिलसिले को तेज कर दिया है। प्रदेशभर में कफ सिरप की गुणवत्ता और उसकी वैधानिकता की जांच के लिए मेडिकल स्टोर्स, होलसेल डिपो, फार्मा इंडस्ट्री और बच्चों के अस्पतालों पर औचक निरीक्षण लगातार जारी हैं। देहरादून, […] The post स्वास्थ विभाग की प्रदेश के सभी बाल चिकित्सकों से अपील, दो साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित सिरप न लिखें… appeared first on Pahadi Khabarnama पहाड़ी खबरनामा.

बाल स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सिरप पर नजर रखें: स्वास्थ्य विभाग की अनोखी अपील
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बाल स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सिरप पर नजर रखें: स्वास्थ्य विभाग की अनोखी अपील

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने सभी बाल चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वे दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप का पर्चा न लिखें।

देहरादून: बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के मद्देनजर, उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर में कफ सिरप की गुणवत्ता और इसकी वैधता की जाँच के लिए छापेमारी की गतिविधियों को तेज कर दिया है। विभाग ने खास तौर पर एंटी-टुस्सिव साइप्रस पर फोकस किया है, जिसे दो साल से कम उम्र के बच्चों को देने की सिफारिश नहीं की गई है।

कार्रवाई का उद्देश्य

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स, होलसेल डिपो, फार्मा इंडस्ट्री और बच्चों के अस्पतालों पर औचक निरीक्षण करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिबंधित दवाओं का उपयोग नहीं किया जा रहा है। चर्चा के अनुसार, कई ऐसे कफ सिरप पहले भी सामने आए हैं जो बच्चों के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।

छापेमारी का ताजा दौर

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में विभाग ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर कई संदिग्ध दवाओं को जब्त किया है। ये कार्रवाई तब शुरू हुई जब कुछ अस्पतालों से बच्चों में दवा उपयोग से संबंधित गंभीर प्रभावों की रिपोर्ट मिली। विभाग ने यह चेतावनी भी दी है कि किसी चिकित्सक द्वारा इन सिरपों का पर्चा लिखना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दवा का चयन बेहद संवेदनशील मुद्दा है। बच्चों की शारीरिक संरचना और इम्यून सिस्टम वयस्कों से अलग होता है जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है। कई दवाएं बच्चों की उम्र, स्वास्थ्य और लक्षणों के अनुकूल नहीं होतीं। इसीलिए, चिकित्सकों को दवा लिखते समय अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने सभी बाल चिकित्सकों से अपील की है कि वे अपने रोगियों की सेहत को प्राथमिकता दें और किसी भी तरह की दवा ठिकाना या मात्रा के संदर्भ में वैधता की जांच करते रहें। साथ ही, डॉक्टरों को अपने रोगियों के अभिभावकों को भी इस विषय पर उचित जानकारी देने की आवश्यकता है ताकि वे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प चुन सकें।

निष्कर्ष

स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उनके अभिभावकों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। हम सभी का कर्तव्य है कि हम बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि उन्हें केवल सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार प्रदान किया जाए।

इसके अलावा, इस विषय पर और जानकारी के लिए, कृपया हमारे पृष्ठ पर जाएं Dharm Yuddh

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सादर,
टीम धर्म युद्ध
प्रिया शर्मा