‘बॉर्डर-2’ पर जातिसूचक भाषा का विवाद, केस दर्ज करने की मांग
एफएनएन, मेरठ : मेरठ के परतापुर थाने में बहुजन जनता दल खोड़ावल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल खोड़ावल ने फिल्म के कलाकार, निर्माता जेपी दत्ता व अन्य और निर्देशक अनुराग सिंह पर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। सन्नी देओल की नई फिल्म ‘बॉर्डर-2’ को जहां देशभर में धमाकेदार ओपनिंग मिली है। वहीं ये […] The post ‘बॉर्डर-2’ में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप, केस दर्ज करने की मांग appeared first on Front News Network.
‘बॉर्डर-2’ पर जातिसूचक भाषा का विवाद, केस दर्ज करने की मांग
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कम शब्दों में कहें तो, फिल्म ‘बॉर्डर-2’ पर जातिसूचक शब्दों के उपयोग को लेकर विवाद पैदा हो गया है, जिसके खिलाफ मेरठ में केस दर्ज करने की मांग की गई है।
मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र में बहुजन जनता दल खोड़ावल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल खोड़ावल ने फिल्म के कलाकार, निर्माता जेपी दत्ता और निर्देशक अनुराग सिंह के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। सन्नी देओल की इस नई ऐतिहासिक फिल्म को देशभर में पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन अभी यह विवादों में भी घिर चुकी है।
खोड़ावल ने रविवार को थाने में दिए गए अपने आवेदन में कहा कि फिल्म में 27 मिनट 37 सेकंड के दौरान सैनिकों के बातचीत में अपमानजनक और जातिसूचक भाषा का प्रयोग किया गया है, जिससे समाज के एक विशेष वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं। आरोप के अनुसार, एक दृश्य में एक कलाकार को जूता पॉलिश करते हुए दिखाया गया है, जहां दूसरे कलाकार द्वारा अपमानजनक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
यह आरोप लगाया गया है कि यह संवाद जानबूझकर फिल्म में डालें गए हैं, जिनसे दलित समाज का सम्मान धूमिल किया गया है और यह जातिगत भेदभाव को भी बढ़ावा देता है। खोड़ावल ने कहा कि इस प्रकार के संवाद राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को नकारते हैं और देश में तनाव का माहौल उत्पन्न कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अति गंभीरता से देखते हुए उन्होंने फिल्म के निर्देशक अनुराग सिंह, निर्माता भूषण कुमार, जेपी दत्ता, निधि दत्ता, और उन सभी कलाकारों के खिलाफ जिन पर आपत्तिजनक भाषा का आरोप है, रिपोर्ट दर्ज करने का आग्रह किया है। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के तहत उचित कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में पुलिस ने कहा है कि वे आरोपों की जांच करेंगे और उचित कदम उठाएंगे। फिल्म जगत में विवादों का यह नया मुद्दा संकेत करता है कि संवेदनशील सामाज परिभाषाएं और संवाद बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फिल्म ‘बॉर्डर-2’ अपनी शुरूआती सफलता के बावजूद अब सामाजिक गतिशीलता के पैमाने पर एक नए प्रश्न को जन्म दे रही है। क्या वाकई फिल्मों में ऐसी भाषाओं का उपयोग सृजनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर किया जा सकता है, या इससे समाज में दरार बढ़ती है? इस विषय पर आगे चर्चा आवश्यक है।
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सादर,
टीम धर्म युद्ध
सविता शर्मा
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Kalpana SinghYeh baat kahin na kahin humein sabak sikha rahi hai. -
Ruchi TanejaBas ismein hum sabko positive soch rakhni hogi. -
Simran KaurMujhe lagta hai iska bahut bada impact hoga. -
Sakshi YadavBahut kuch kehne ko hai, par abhi rukte hain. -
Bhavna ThakurIs situation ko ab seriously lena padega.