बोर्डिंग स्कूल में यौन शोषण: स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर सजा, प्रिंसिपल के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई

नाबालिग छात्रा के यौन शोषण में बोर्डिंग स्कूल के स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर कारावास, प्रिंसिपल पर भी केस चलेगा! देहरादून के मसूरी रोड स्थित एक प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूल में नाबालिग छात्रा के यौन शोषण और छेड़छाड़ मामले में पोक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। दोषी स्वीमिंग कोच सुरेंद्र पाल सिंह को […] The post बोर्डिंग स्कूल में यौन शोषण – स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर कैद, प्रिंसिपल पर भी कानूनी कार्रवाई appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

बोर्डिंग स्कूल में यौन शोषण: स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर सजा, प्रिंसिपल के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई
नाबालिग छात्रा के यौन शोषण में बोर्डिंग स्कूल के स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर कारावास, प्रिंसिपल �

बोर्डिंग स्कूल में यौन शोषण: स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर सजा, प्रिंसिपल के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के एक बोर्डिंग स्कूल में नाबालिग छात्रा के यौन शोषण के मामले में कॉलेज के स्वीमिंग कोच को 5 साल की कठोर सजा और प्रिंसिपल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न केवल एक गंभीर अपराध का उजागर करता है, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुरक्षा प्रावधानों की आवश्यकता को भी दर्शाता है।

मामले का सारांश

देहरादून के मसूरी रोड पर स्थित एक प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूल की एक 14 वर्षीय छात्रा को 2018 में यौन शोषण का शिकार होना पड़ा। इस मामले में पोक्सो कोर्ट ने सुनवाई के बाद स्वीमिंग कोच सुरेंद्र पाल सिंह को 5 साल की कठोर कारावास और ₹20,000 का अर्थदंड सुनाया। इसके अलावा, पीड़िता को राज्य सरकार द्वारा ₹1 लाख मुआवजे का आदेश भी दिया गया है।

घटना के विवरण

इस घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता ने अपने परिवार के सदस्यों को इसके बारे में बताया। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुँचा, जहां उसने अपनी गवाही दी। अदालत ने पाया कि कोच ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग करते हुए छात्रा का यौन शोषण किया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर, अदालत ने कोच को दोषी ठहराया।

प्रिंसिपल की जिम्मेदारी

इस मामले में प्रिंसिपल के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने पाया कि प्रधानाचार्य ने नाबालिग पीड़िता के साथ हुई गलतफहमियों को छिपाने का प्रयास किया। इसके लिए उसे आगामी 15 दिसंबर को अलग से कानून के समक्ष पेश होने का आदेश मिला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने इस मामले को खत्म करने के लिए ₹25 लाख का सौदा कराने की कोशिश की थी।

समाज और सुरक्षा की दृष्टि

यह घटना केवल एक ही किशोरी के बलात्कारी से उत्पीड़न का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बोर्डिंग स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए, स्कूलों को कठोर सुरक्षा प्रावधानों को लागू करना चाहिए ताकि बच्चों का सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

समापन

इस निर्णय ने बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि ऐसी घटनाओं के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता कितनी आवश्यक है। सभी स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त नीतियाँ और दिशानिर्देश लागू करें।

हालांकि न्याय का अंगालीन किया गया है, लेकिन यह वाकई हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम ऐसी घटनाओं के प्रति सजग रहें और समाज के हर वर्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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सादर,
टाइम्स ऑफ धामर
टीम धर्म युद्ध