भारत पर्व 2023 में “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” झांकी की विशेष प्रदर्शनी
नई दिल्ली: • भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की झांकी रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान विभिन्न प्रदेशों एवं मंत्रालयों की झांकियों का प्रेस के समक्ष अपने-अपने राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत की। इस अवसर पर जानकारी दी गई कि उत्तराखण्ड राज्य की झांकी इस […] The post भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की झांकी appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
भारत पर्व 2023 में “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” झांकी की विशेष प्रदर्शनी
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड की झांकी भारत पर्व में “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” के थीम के तहत प्रदर्शित होगी, जो सांस्कृतिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता को दर्शाएगी।
नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति और विविधता का अनुपम उत्सव, भारत पर्व, इस वर्ष 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित होगा। रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में विभिन्न राज्यों एवं मंत्रालयों की झांकियों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड की झांकी को “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” के थीम पर विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
उत्तराखण्ड की विकास यात्रा का अद्भुत प्रदर्शन
उत्तराखण्ड राज्य की यह झांकी, आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप, राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक और पारंपरिक आत्मनिर्भरता को उजागर करती है। सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक और झांकी के नोडल अधिकारी श्री के.एस. चौहान ने कहा कि यह झांकी न सिर्फ विजय का प्रतीक है, बल्कि यह उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं शिल्पी कारीगरों की कलात्मक महारत का भी प्रतिनिधित्व करती है।
झांकी के महत्वपूर्ण तत्व
झांकी के ट्रैक्टर सेक्शन में पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल और रणसिंगा की आकर्षक तांबे की प्रतिकृतियां शामिल हैं। इसके अलावा, पहले भाग में तांबे के मंजीरे की एक विशाल मूर्ति, जबकि बीच के सेक्शन में खूबसूरत तांबे के बर्तन जैसे गागर, सुरही और कुण्डी को प्रदर्शित किया गया है। ये सभी तत्व उत्तराखण्ड के पारंपरिक घरेलू जीवन के आवश्यक घटक हैं।
सांस्कृतिक कहानी का चित्रण
झांकी के साइड पैनल में पारंपरिक वाद्ययंत्र भोंकोर के चित्रण को देखकर सांस्कृतिक कहानी का समृद्ध अनुभव मिलेगा। झांकी के पिछले सेक्शन में एक तांबे के कारीगर की प्रभावशाली मूर्ति है, जो तांबे के बर्तन बनाने की प्रक्रिया में व्यस्त है। इसके चारों ओर, बारीकी से बने तांबे के बर्तन उनकी कठिनाई और श्रम का प्रतीक हैं।
स्थानीय कारीगरों का योगदान
उत्तराखण्ड की यह झांकी कारीगरी, सांस्कृतिक योगदान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका और कौशल को दर्शाती है। श्री चौहान ने आगे बताया कि उत्तराखण्ड की यह झांकी प्राचीन शिल्प कला के माध्यम से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती है। स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित तांबे के बर्तन न सिर्फ उत्कृष्ट शिल्प कौशल का प्रमाण हैं, बल्कि राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है।
आजीविका का सशक्त माध्यम
यह प्राचीन शिल्प, अनेक शिल्पी परिवारों के लिए केवल सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण आजीविका का साधन भी है। पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकें, प्रत्येक कृति को कला के अद्वितीय नमूने में परिवर्तित कर देती हैं, जो शिल्पी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का स्पष्ट प्रतिबिंब होती हैं।
इस झांकी का उत्सव, उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान करता है। झांकी में प्रदर्शित सभी तत्व ना केवल स्थानीय कारीगरों के कौशल का परिचायक हैं, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनती हैं।
अवश्य देखें: धर्म युद्ध पर अधिक जानकारी एवं अपडेट के लिए।
संपर्क - टीम धर्म युद्ध (राधिका शर्मा)