राज्य कर विभाग की कठोर कार्रवाई: बिना बिजली कनेक्शन वाली 4 फर्मों में 8 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा

देहरादून: राज्य कर मुख्यालय की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने जीएसटी चोरी के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। आयुक्त सोनिका के निर्देश पर विभाग की विशेष टीमों ने हरिद्वार में एक साथ छापेमारी कर 04 संदिग्ध फर्मों पर शिकंजा कसा। ये फर्में एलईडी लाइट्स और लिथियम बैटरी के व्यापार के नाम पर करोड़ों रुपये […] The post राज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, बिना बिजली कनेक्शन वाली 4 फर्मों में 8 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

राज्य कर विभाग की कठोर कार्रवाई: बिना बिजली कनेक्शन वाली 4 फर्मों में 8 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा
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राज्य कर विभाग की कठोर कार्रवाई: बिना बिजली कनेक्शन वाली 4 फर्मों में 8 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा

देहरादून: राज्य कर मुख्यालय की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने एक बड़ी जीएसटी चोरी का पर्दाफाश किया है। आयुक्त सोनिका के निर्देश पर विभाग की विशेष टीमों ने हरिद्वार में 4 संदिग्ध फर्मों पर एक साथ छापेमारी की। ये फर्में एलईडी लाइट्स और लिथियम बैटरी के व्यापार के नाम पर करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग कर रही थीं और इस तरह आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का दुरुपयोग कर रही थीं।

कम शब्दों में कहें तो: राज्य कर विभाग ने बिना बिजली कनेक्शन वाली फर्मों में जीएसटी चोरी का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 8 करोड़ रुपये की चोरी का मामला सामने आया है।

जीएसटी चोरी का खेल

विभागीय जांच में यह सामने आया है कि ये फर्में एक-दूसरे के साथ मिलकर फर्जी खरीद-बिक्री का खेल खेल रही थीं। जबकि वास्तव में इनका व्यापार नगण्य था। चौंकाने वाली बात यह है कि बिजली विभाग ने जिन फर्मों की बिजली काट रखी थी, वे भी करोड़ों रुपये के ई-वे बिल बना रही थीं। इसका सीधा मतलब है कि वे अभी भी कारोबार कर रही थीं, जो कि अवैध था।

छापेमारी के दौरान मिले सबूत

छापेमारी के दौरान यह खुलासा हुआ कि फर्मों के गेट रजिस्टर में कोई भी माल की आवाजाही दर्ज नहीं थी, जिससे पता चलता है कि इनका व्यापार सिर्फ कागजों पर ही चल रहा था। हरिद्वार स्थित फर्मों से जुड़ी सितारगंज की एक फर्म भी जांच के दायरे में आई, जो पिछले दो सालों से बंद थी, लेकिन उसके नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया जा रहा था।

ई-वे बिल की जांच

ई-वे बिल डाटा की जांच में किसी भी वाहन की वास्तविक आवाजाही का कोई सबूत नहीं मिला। न ही टोल प्लाजा क्रॉसिंग का डेटा मिला, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि संपूर्ण कारोबार फर्जी बिलों पर आधारित था। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि फर्मों द्वारा घोषित खरीद-बिक्री और स्टॉक में भारी अंतर था।

आगे की कार्रवाई और चेतावनी

विभागीय सूत्रों के अनुसार, फिलहाल 8 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की पुष्टि हो चुकी है, और यह भी संभावना है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। छापेमारी की कार्रवाई शनिवार देर रात तक जारी रही। विभाग की 10 टीमों और 30 अधिकारियों ने मिलकर यह ऑपरेशन संचालित किया। छापे के दौरान विभाग ने फर्मों के कंप्यूटर, मोबाइल डिवाइस और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

आयुक्त सोनिका ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फर्जी बिलिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए कर चोरी करने वाली किसी भी फर्म को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, विभाग ने इन मामलों की सूचना अन्य एजेंसियों, जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और पुलिस को भी जांच के लिए भेजी जा रही है।

प्रदेश में हड़कंप

राज्य कर विभाग की इस कार्रवाई ने प्रदेश में फर्जी जीएसटी नेटवर्क चलाने वालों में हड़कंप मचा दिया है। विभाग ने कहा है कि आगे भी इस तरह की संदिग्ध फर्मों पर लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि सरकारी राजस्व की चोरी करने वाले टैक्स माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।

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– टीम धर्म युद्ध, प्रिया मेहरा